इस अंक में :

इस अंक में पढ़े : शेषनाथ प्रसाद का आलेख :मुक्तिबोध और उनकी कविताओं का काव्‍यतत्‍व, डॉ. गिरीश काशिद का शोध लेख '' दलित चेतना के कथाकार : विपिन बिहारी, डॉ. गोविंद गुंडप्‍पा शिवशिटृे का शोध लेख '' स्‍त्री होने की व्‍यथा ' गुडि़या - भीतर - गुडि़या ', शोधार्थी आशाराम साहू का शोध लेख '' भारतीय रंगमंच में प्रसाद के नाटकों का योगदान '' हरिभटनागर की कहानी '' बदबू '', गजानन माधव मुक्तिबोध की कहानी '' क्‍लॅड ईथरली '' अंजना वर्मा की कहानी '' यहां - वहां, हर कहीं '' शंकर पुणतांबेकर की कहानी '' चित्र '' धर्मेन्‍द्र निर्मल की छत्‍तीसगढ़ी कहानी '' मंतर '' अटल बिहारी बाजपेयी की गीत '' कवि, आज सुनाओ वह गान रे '' हरिवंश राय बच्‍चन की रचना ,ईश्‍वर कुमार की छत्‍तीसगढ़ी गीत '' मोला सुनता अउ सुमत ले '' मिलना मलरिहा के छत्‍तीसगढ़ी गीत '' छत्‍तीसगढ़ी लदका गे रे '' रोजलीन की कविता '' वह सुबह कब होगी '' संतोष श्रीवास्‍तव ' सम ' की कविता '' दो चिडि़यां ''

शुक्रवार, 5 जुलाई 2013

काव्य संग्रह 'दूर क्षितिज में ' का विमोचन


वेदना से निकलकर संवेदना में निखरती है कविता

छुईखदान में आचार्य पं. रमाकांत शर्मा का ऐतिहासिक
भावभीना अभिनंदन, 
राजनांदगांव। भाषा और रचना की गरिमा, रचनाकार की गरिमा के साथ-साथ अभिव्यक्ति में उसके भाव तथा संवेदना की गरिमा से अलग नहीं हो सकती। सृजनकर्म में जो इस गरिमा के अधिकारी हैं, उनका लेखन समय व धैर्य की ऑंच में तपकर कुंदन की तरह निखर उठता है। वह जीवन को, उसकी सच्चाई और गहराई में पहुंॅचकर निहारने के लिए एक गवाक्ष बन जाता है। कविता वेदना से निकलकर संवेदना में निखरती है।
उक्त उद्गार डॉ. चन्द्रकुमार जैन ने छुईखदान में विगत 13 मई को हिन्दी साहित्य समिति, छुईखदान द्वारा आयोजित वरिष्ठ साहित्यकार आचार्य रमाकांत शर्मा के अमृत महोत्सव और उनकी काव्य कृति दूर क्षितिज में के विमोचन समारोह के अवसर पर व्यक्त किये । डॉ. जैन ने समिति की गतिविधियों के अहम पड़ाव स्वरूप आयोजित आचार्य पं. रमाकांत शर्मा के अमृत महोत्सव 'हीरक जयंती' नागरिक अभिनंदन तथा काव्य कृति 'दूर क्षितिज में' के विमोचन के भव्य, आत्मीय एवं गरिमामय समारोह को अनुकरणीय निरुपित किया। समारोह के मुख्य विशिष्ट वक्ता के रूप में डॉ. जैन ने आचार्य पं. शर्मा के व्यक्तित्व की सरलता, तरलता और हार्दिकता को उनकी रचनाधर्मिता का भी प्राण-तत्व मानते हुए कहा कि ऐसे समर्पित साधु सर्जकों से साहितय जगत और हमारे प्रदेश का गौरव वर्द्धन हो रहा है।
समारोह के मुख्य अतिथि पद्मश्री डॉ. महोदव पाण्डे ने विद्वतापूर्ण उद्बोधन में जीवन की अभिव्यक्ति तथा समाज के उत्थान व नव निर्माण में साहित्यकार की भूमिका का मर्म समझाया। उन्होंने पं. शर्मा के लेखन को कसौटी पर परखी हुई सच्ची अनुभूति का सार्थक दसतावेज माना।
अध्यक्षीय आसंदी से छत्तीसगढ़ राजभाषा आयोग के अध्यक्ष तथा प्रसिद्ध कवि पं. दानेश्वर शर्मा ने कविता के प्रभाव और स्वभाव की पड़ताल करते हुए रोचक शैली में कहा कि कवि वास्तव में ऋषि तुल्य होता है क्योंकि आदि कवि तो स्वयं परमात्मा ही है। उन्होंने पं. रमाकांत शर्मा की साहित्य साधना को आत्मीय सृजन चेतना का पर्याय कहा।
कार्यक्रम में विशिष्ट अतिथि एससीईआरटी रायपुर के व्याख्याता श्री बी.आर. साहू ने साहित्य की जरूरत पर जोर देते हुए, सर्जकों के सम्मान को हर समय की आवश्यकता निरूपित किया। अभिनंदन के प्रत्युत्तर में आचार्य पं.रमाकांत शर्मा ने कहा कि उनकी साहित्यिक  जीवन यात्रा में हिंदी साहित्य समिति छुईखदान तथा नगर के प्रतिनिधि गीतकार एवं यशस्वी कवि स्व. डॉ. रतन जैन सहित यहां के सजग वातावरण की बड़ी भूमिका रही। इस अभिनंदन ने उन्हे नई ऊर्जा के साथ नई जिम्मेदारी के वहन की नई दिशा दी है। यह सौभाग्य का प्रसंग है।
सभी अतिथि वक्ताओं सहित बड़ी संख्या में उपस्थित रचनाकारों तथा वभी वर्ग के सुधी अभ्यागतों ने श्रेष्ठ आयोजन के लिए हिन्दी साहित्य समिति, छुईखदान की मुक्तकण्ठ से सराहना करते हुए अध्यक्ष श्री वीरेन्द्र बहादुर सिंह एवं  महासचिव श्री निशिकांत त्रिपाठी तथा सभी सदस्यों को बधाई दी।
कार्यक्रम की शुरूआत अतिथियों द्वारा मां सरस्वती की पूजा-अर्चना के साथ हुई। तत्पश्चात आयोजन समिति द्वारा अतिथियों का पुघ्पहार से आत्मीय स्वागत किया गया। समिति के महासचिव निशीकांंत त्रिपाठी ने सचिवीय प्रतिवेदन पढ़ा।
श्री त्रिपाठी ने अपने प्रतिवेदन में हिन्दी साहित्य समिति छुईखदान के गठन 08 फरवरी 1948 से लेकर समिति की 1973 में आयोजित रजत जयंती, 1998 में आयोजित स्वर्ण जयंती, 2002 में समिति के संस्थापक सदस्य स्व. डॉ. रतन जैन ने अमृत महोत्सव का आयोजन एवं 2008 में डॉ. रतन जैन के काव्य संग्रह 'रक्त पुष्प' के विमोचन समारोह एवं अन्य गतिविधियों से अतिथियों और श्रोताओं को अवगत कराया।
तदुपरान्त नगर के यशस्वी कवि, शिक्षा विद, पुराण प्रवक्ता और वरण्य साहित्यकार एवं समिति के संरक्षक आचार्य पं. रमाकान्त शर्मा के काव्य संग्रह 'दूर क्षितिज में' का विमोचन तालियों की गड़गड़ाहट के बीच अतिथियों ने किया। काव्य संग्रह के विमोचन के बाद आचार्य श्री के सम्मान का क्रम हिन्दी साहित्य समिति छुईखदान के अध्यक्ष वीरेन्द्र बहादुर सिंह द्वारा अभिनंदन पत्र के पठन के साथ शुरू हुआ। समिति द्वारा पं. रमाकांत शर्मा को शाल, श्रीफल, अभिनंदन पत्र एवं स्मृति चिन्ह भेंटकर आत्मीय सम्मान किया गया। बार एसोसिएशन छुईखदान, ब्राह्मण समाज छुईखदान, पत्रकार संघ, छुईखदान, चचेड़ी से आए आचार्य श्री के परिजनों, अंचल के साहित्यकारों समेत नगर के साहित्यिक, शैक्षणिक, सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधियों एवं उनके शिष्यों तथा गणमान्य नागरिकों ने आत्मीय सम्मान किया।
कार्यक्रम के अंत में हिन्दी साहित्य समिति छुईखदान द्वारा मंचस्थ अतिथियों को शाल एवं स्मृति चिन्ह भेंटकर सम्मानित किया गया।
इस अवसर पर हिन्दी साहित्य समिति छुईखदान, प्रदेश ब्राम्हा्रण समाज बार एसोसिएशन छुईखदान, सेवाभावी संस्था प्रेरणा पत्रकार संघ छुईखदान, ब्राह्मण समाज छुईखदान, पूर्व नगर पंचायत अध्यक्ष शांतिलाल सांखला, व्यापारी संघ की ओर से आजाद जैन, शैलेन्द्र जैन, योगेन्द्र महोबिया, शांतिलाल पारख एवं युवा कवि सतीश महोबिया ने भी शाल एवं श्रीफल से पं. रमाकांत शर्मा का अभिनंदन किया। उनके पैत्रिक ग्राम चचेड़ी कवर्धा से पधारे उनके परिजनों क्रमश: विश्वनाथ शर्मा, कौशल प्रसाद शर्मा, पं. अश्विनी प्रसाद शर्मा, पं. बसंत शर्मा, नरेन्द्र मिश्रा, निखिलेश शर्मा, हरीश शर्मा, कमलेश मिश्रा, आचार्य श्री के सुपुत्र क्रमश: शरद शर्मा, हेमन्त शर्मा, एवं शिशिर शर्मा ने भी भावभीना आत्मीय अभिनंदन किया।
इस अवसर पर छग शासन द्वारा हाजी हसन अली सम्मान से विभूषित शायर अब्दुस्सलाम कौसर, साहित्यकार जीवन यदु,साहित्यकार हीरालाल अग्रवाल, लोककला समीक्षक एवं साहित्यकार डॉ. पीसीलाल यादव, बीडी एल श्रीवास्तव, साकेत साहित्य परिषद सुरगी के अध्यक्ष थनवार सचिन निषाद, लखनलाल साहू, कुलेश्वर दास साहू, भागवताचार्य रामकुमार शर्मा, सुखनंदन सोनी, डॉ. सुखनंदन सिंह, डॉ. भूषण महोबिया, मोतीलाल जंघेल, शिवेन्द्र किशोर दास,  मिहिर झा, मनोज चौबे, गौतम सिंह गहलोत, हेमन्त वैष्णव, पत्रकार संजीव दुबे, सज्जाक खान, विक्रम बहादुर सिंह समेत कला, साहित्य एवं खेल से जुड़े व्यक्तित्व तथा गणमान्य नागरिक उपस्थित थे।
भारत की प्रथम मीडिया डायरेक्टरी
पत्रकारिता कोश का 12 अंक लोकार्पित
भगवान विष्णु के 12वें अवतार थे श्रीराम। राशियों की संख्या 12 होती है। 12 महीनों से ऋतु चक्र पूरा होता है और यह पत्रकारिता कोश् का 12वाँ अंक है जिसमें मीडिया जगत की संपूर्ण जानकारी समाहित है। यह उद्गार मुंबई विश्वविद्यालय के पूर्व हिंदी विभागाध्यक्ष तथा गरवारे इंस्टीट्यूट में पत्रकारिता विभाग के समन्वयक डॉ. रामजी तिवारी ने व्यक्त किए। वह अथक सेवा संघ द्वारा घाटकोपर में आयोजित पत्रकारिता कोश.2012 के लोकार्पण समारोह में बोल रहे थे। उन्होंने आगे कहा कि यह कोश भारतीय मीडिया के बारे में पूरी सूचना व जानकारी मुहैया कराकर देश को जोड़ने का काम कर रहा है और इसे निरंतर जारी रखने की आवश्यकता है।
समारोह अध्यक्ष व दोपहर का सामना के कार्यकारी संपादक प्रेम शुक्ल ने कहा कि पत्रकारिता कोश की प्रसिद्धि देश के गली.कूचे तक फैल चुकी है और अब इसकी गूंज विदेशों में भी पहुंचने लगी है। इस कोश ने पहले अंक से लेकर अब तक के 12 वर्षों में लगभग 600 फीसदी की वृद्धि दिखाई है जिससे मीडिया के लोकतंत्रीकरण का पता चलता है। उन्होंने कहा कि सोशल मीडिया ने भी आम आदमी की ताकत को तेज किया है।
इस अवसर पर सुप्रसिद्ध भोजपुरी साहित्यकार डॉ. आशारानी लाल के भोजपुरी कथा संग्रह सितली के दूसरे संस्करण का विमोचन भी किया गया। डॉ. रामजी तिवारी ने सितली पर विशेष वक्तव्य के तहत कहा कि सितली के जरिए लेखिका ने नारी की सबलता को आवाज देते हुए भोजपुरी समाज के दुख दर्द को पाठकों के सामने लाया है। प्रेम शुक्ल ने कहा कि सिद्धहस्त लेखिका डॉ. आशा रानी लाल ने सितली में नारी हृदय की संवेदनाओं का परचम लहराया गया है और इसीलिए स्वानंद प्रकाशन को इसके द्वितीय संस्करण का प्रकाशक बनने का गर्व है।
कार्यक्रम की शुरूआत माननीय अतिथियों के दीप प्रज्ज्वलन व सरस्वती प्रतिमा पर माल्यार्पण से हुई। रवि यादव की सरस्वती वंदना के बाद काव्य रंग में गीतेश गीत डॉ. मुकेश गौतम डॉ. रजनीकांत मिश्र सुरेश मिश्र व रास बिहारी पांडेय ने काव्य पाठ किया। स्टार न्यूज के सीनियर एडीटर जीतेंद्र दीक्षित ने कहा कि पत्रकारिता कोश में सटीक सही व अपडेटेड जानकारी है। यह समस्त मीडिया कर्मियों से संपर्क के रूप में काफी उपयोगी है। निर्भय पथिक के संपादक अश्विनी कुमार मिश्र ने कहा कि आज का मीडिया पांचवें स्तंभ के रूप में सुपरिचित हो रहा है लेकिन पत्रकारिता में और भी जिद्दीपन लाने की जरूरत है। बिजनेस भास्कर के कंसल्टिंग एडीटर पी. अजय कुमार ने पत्रकारिता की यात्रा सुगमतापूर्वक चलाने के लिए लोगों से फेस बुक ट्विटर में रूचि लेने के साथ.साथ अखबार और पत्रिकाओं का भी अध्ययन करने की अपील की। इस अवसर पर हिंदी विद्या प्रचार समिति के मंत्री डॉ. राजेंद्र सिंह राष्ट्रीय औद्योगिक इंजीनियरी संस्थान के राजभाषा अधिकारी व कवि सुरेश चंद्र जैन महानगर टेलीफोन निगम लिमिटेड के सहायक निदेशक ;राजभाषा कलीम उल्लाह खान कौमी फरमान पत्रिका के संपादक रईस खान बिजनेस स्टैंडर्ड के प्रधान संवाददाता सुशील मिश्र नवभारत के राजनीतिक संवाददाता सुरेंद्र मिश्र हमलोग संस्था के अध्यक्ष एड. विजय सिंह आदि सहित अनेक पाकारार व साहित्यकार मौजूद थे।
कार्यक्रम के दौरान नवभारत के वरिष्ठ पत्रकार नामदार राही अखिलेश कुमार मिश्र दयाशंकर पांडेय राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के युवा नेता अरबिंद तिवारी अक्रॉस मुंबई के संपादक संजय खिमेश्रा दोपहर का सामना के संवाददाता श्रीश उपाध्याय पुष्पराज मिश्र शेषनारायण त्रिपाठी रविन्द्र मिश्रा नागेंद्र शुक्ल पूर्ण विराम व एकता चक्र के संपादक यार मोहम्मद खान बॉलीवुड ब्लॉग के संपादक मनोज यादव मीडिया समाचार के संपादक पवन दुबे लेखक सलाम उसमान शेख निडर राही के संपादक पप्पू वर्मा टाइम्स ऑफ  ठाणे के संपादक दिनेश वर्मा यशोहिन्द के संपादक दीपक वर्मा उर्दू चैनल के संपादक कमर सिद्दीकी विकलांग की पुकार के कार्यकारी संपादक सरताज मेहदी विद्युत ध्वनि के संपादक राकेश मणि तिवारी आजका दौर के संपादक श्याम सुंदर शर्मा लेखिका मधुलता अरोड़ा पत्रकार लक्ष्मी यादव जनखुलासा के संपादक सौदागर जाधव संवाद शक्ति के संपादक पवन तिवारी हिन्दुस्तान की आवाज के संपादक मुक़ीम शेख जगत प्रहरी के प्रबंध संपादक मुश्ताक खान तेजस्वी दुनिया के संपादक महेश शर्मा निर्भय पथिक के संवाददाता सुरेंद्र दुबे हमारा महानगर के संवाददाता हरिश्चंद्र पाठक मुंब्रा दर्पण समाचार के संवाददाता लहिरी मियाँ ज्योतिषि लेखक आचार्य पवन त्रिपाठी मजमू ए सदाक़त के सहायक संपादक सैयद फरमान अली वरिष्ठ पत्रकार सैयद मुमताज रिज़्वी पत्रकार किशोर पणिकर समाजसेवी अरूण सिंह कवि अनिल त्रिपाठी कड़क दुर्गा वाहिनी महिला संगठन की अध्यक्षा व ज्वलंत समाचार की संपादक मीता सिंह के अलावा साहित्य पत्रकारिता व कला जगत से संबद्ध अनेक विभूतियों को सम्मानित किया गया।
कार्यक्रम में पत्रकारिता कोश के संपादक आफताब आलम तथा सितली की रचनाकार डॉ आशा रानी लाल ने भी अपनी भावनाएं व्यक्त कीं। कार्यक्रम में अतिथियों का स्वागत अथक सेवा संघ के अध्यक्ष अनिल गलगली ने किया। कार्यक्रम का संचालन डॉ. अनंत श्रीमाली ने किया जबकि आभार प्रदर्शन पत्रकारिता कोश के सहायक संपादक राजेश विक्रांत ने किया।

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