इस अंक में :

डॉ. रवीन्‍द्र अग्निहोत्री का आलेख '' हिन्‍दी एक उपेक्षित क्षेत्र '' प्रेमचंद का आलेख '' साम्‍प्रदायिकता एवं संस्‍कृति '' भीष्‍म साहनी की कहानी '' झूमर '' सत्‍यनारायण पटेल की कहानी '' पनही '' अर्जुन प्रसाद की कहानी '' तलाक '' जयंत साहू की छत्‍तीसगढ़ी कहानी '' परसार '' गिरीश पंकज का व्‍यंग्‍य '' भ्रष्‍ट्राचार के खिलाफ अपुन '' कुबेर का व्‍यंग्‍य '' नो अपील, नो वकील, घोषणापत्र '' गीत गजल कविता

शुक्रवार, 5 जुलाई 2013

बसंत आ गे

बसंत गीत

-  आत्माराम कोशा ' अमात्‍य ' -
ऋतुआ बसंत आगे, रतिया के कंत आगे।
मतौना हवा धरे/  मेछरौना दवा धरे।
जन - मन म उम्हियागे।। ऋतुआ।।
आमा मउर म बइठे,
परसा फूल म पइठे।
कुसुम बान हाथ धरे,
पिंयर - पिंयर सरसों म गइठे।
माहकत दिक - दिगंत आगे।। ऋतुआ।।
कोयली के कुहकी म वो,
नंगारा .. डाहँकी म वो,
बौराये भँवरा के संग,
बतियन बाँहकी - बाँहकी म वो।
चोला उतार के संग आगे।। ऋतुआ।।
रसरस - रसरस, सुरसुर - सुरसुर
पीरा उमचे .. गुरतुर - गुरतुर।
महकत हवा/ दर्दे दिल के दवा,
गुदगुद - गुदगुद, तुरतुर - तुरतुर।
प्रेम - परछो के आदि - अंत आगे।। ऋतुआ।।
अनुप्रास अलंकार के संग,
प्रकृति के सिंगार के संग।
सबद - सबद रस - रंग बरसे,
रंग रसिया लगवार के संग
प्रसाद, निराला, पंत आगे।। ऋतुआ।।
  • पता - पुराना गंज मंडी चौक, राजनांदगांव  (छग.)

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