इस अंक में :

इस अंक में पढ़े : शेषनाथ प्रसाद का आलेख :मुक्तिबोध और उनकी कविताओं का काव्‍यतत्‍व, डॉ. गिरीश काशिद का शोध लेख '' दलित चेतना के कथाकार : विपिन बिहारी, डॉ. गोविंद गुंडप्‍पा शिवशिटृे का शोध लेख '' स्‍त्री होने की व्‍यथा ' गुडि़या - भीतर - गुडि़या ', शोधार्थी आशाराम साहू का शोध लेख '' भारतीय रंगमंच में प्रसाद के नाटकों का योगदान '' हरिभटनागर की कहानी '' बदबू '', गजानन माधव मुक्तिबोध की कहानी '' क्‍लॅड ईथरली '' अंजना वर्मा की कहानी '' यहां - वहां, हर कहीं '' शंकर पुणतांबेकर की कहानी '' चित्र '' धर्मेन्‍द्र निर्मल की छत्‍तीसगढ़ी कहानी '' मंतर '' अटल बिहारी बाजपेयी की गीत '' कवि, आज सुनाओ वह गान रे '' हरिवंश राय बच्‍चन की रचना ,ईश्‍वर कुमार की छत्‍तीसगढ़ी गीत '' मोला सुनता अउ सुमत ले '' मिलना मलरिहा के छत्‍तीसगढ़ी गीत '' छत्‍तीसगढ़ी लदका गे रे '' रोजलीन की कविता '' वह सुबह कब होगी '' संतोष श्रीवास्‍तव ' सम ' की कविता '' दो चिडि़यां ''

बुधवार, 10 जुलाई 2013

नास्तिक




- गुरप्रीत सिंह -

- यह लडका तो पूर्णत: नास्तिक है।''
- यह तो कभी मन्दिर भी नहीं जाता।''
 नवयुवक के प्रति अक्सर ये टिप्पणियां सुनाइ दे जाती थी।
यह सत्य है कि वह नवयुवक  कभी धार्मिक स्थलों पर अपना सिर झुकाने या प्रवचन सुनने नहीं गया। अगर कहीं जाता है, तो वह है, खेल का मैदान।
- खेलने के अतिरिक्त इसे कुछ सूझता ही नहीं । यह तो घोर नास्तिक है।''
एक और टिप्पणी।
एक दिन उस नवयुवक ने इन टिप्पणियों का उतर दे दिया।
कार्यक्रम मे भाग लेने जा रहे थे। वही मन्दिर के पास धूप में एक दुर्बल गाय बीमार पडी थी । दो तीन कुते गाय को घेरे खडे थे। एक दो लोगो ने कुतों को भगाया। कुते फिर आ जाते ।
तभी वह नवयुवक अपने साथियों के साथ वहा से गुजरा तो उस कि घावों का उपचार किया। चारे पानी कि व्यवस्था की। उस दिन नवयुवक अपना खेल छोड़कर गाय के पास बैठ गया। दूसरी तरफ  अब भी मन्दिर मे कथा सुननेलोग जा रहे थे।

पता - वीपीओ बगीचा,तहसील रायसिंह नगर, जिला - श्री गंगानगर,( राजस्थान)

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