इस अंक में :

इस अंक में पढ़े : ( आलेख )तनवीर का रंग संसार :महावीर अग्रवाल,( आलेख )सुन्दरलाल द्विजराज नाम हवै : प्रो. अश्विनी केशरवानी, ( आलेख )छत्‍तीसगढ़ी हाना – भांजरा : सूक्ष्‍म भेद- संजीव तिवारी,( आलेख )लील न जाए निशाचरी अवसान : डॉ्. दीपक आचार्य,( कहानी )दिल्‍ली में छत्‍तीसगढ़ : कैलाश बनवासी ,( कहानी )खुले पंजोंवाली चील : बलराम अग्रवाल,( कहानी ) खिड़की : चन्‍द्रमोहन प्रधान,( कहानी ) गोरखधंधा :हरीश कुमार अमित,( व्‍यंग्‍य )फलना जगह के डी.एम: कुंदन कुमार ( व्‍यंग्‍य )हर शाख पे उल्लू बैठा है, अन्जामे - गुलिश्ता क्या होगा ?: रवीन्‍द्र प्रभात, (छत्‍तीसगढ़ी कहानी) गुरुददा : ललितदास मानिकपुरी, लघुकथाएं, कविताएं..... ''

बुधवार, 10 जुलाई 2013

नास्तिक




- गुरप्रीत सिंह -

- यह लडका तो पूर्णत: नास्तिक है।''
- यह तो कभी मन्दिर भी नहीं जाता।''
 नवयुवक के प्रति अक्सर ये टिप्पणियां सुनाइ दे जाती थी।
यह सत्य है कि वह नवयुवक  कभी धार्मिक स्थलों पर अपना सिर झुकाने या प्रवचन सुनने नहीं गया। अगर कहीं जाता है, तो वह है, खेल का मैदान।
- खेलने के अतिरिक्त इसे कुछ सूझता ही नहीं । यह तो घोर नास्तिक है।''
एक और टिप्पणी।
एक दिन उस नवयुवक ने इन टिप्पणियों का उतर दे दिया।
कार्यक्रम मे भाग लेने जा रहे थे। वही मन्दिर के पास धूप में एक दुर्बल गाय बीमार पडी थी । दो तीन कुते गाय को घेरे खडे थे। एक दो लोगो ने कुतों को भगाया। कुते फिर आ जाते ।
तभी वह नवयुवक अपने साथियों के साथ वहा से गुजरा तो उस कि घावों का उपचार किया। चारे पानी कि व्यवस्था की। उस दिन नवयुवक अपना खेल छोड़कर गाय के पास बैठ गया। दूसरी तरफ  अब भी मन्दिर मे कथा सुननेलोग जा रहे थे।

पता - वीपीओ बगीचा,तहसील रायसिंह नगर, जिला - श्री गंगानगर,( राजस्थान)

कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें