इस अंक में :

डॉ. रवीन्‍द्र अग्निहोत्री का आलेख '' हिन्‍दी एक उपेक्षित क्षेत्र '' प्रेमचंद का आलेख '' साम्‍प्रदायिकता एवं संस्‍कृति '' भीष्‍म साहनी की कहानी '' झूमर '' सत्‍यनारायण पटेल की कहानी '' पनही '' अर्जुन प्रसाद की कहानी '' तलाक '' जयंत साहू की छत्‍तीसगढ़ी कहानी '' परसार '' गिरीश पंकज का व्‍यंग्‍य '' भ्रष्‍ट्राचार के खिलाफ अपुन '' कुबेर का व्‍यंग्‍य '' नो अपील, नो वकील, घोषणापत्र '' गीत गजल कविता

बुधवार, 10 जुलाई 2013

नास्तिक




- गुरप्रीत सिंह -

- यह लडका तो पूर्णत: नास्तिक है।''
- यह तो कभी मन्दिर भी नहीं जाता।''
 नवयुवक के प्रति अक्सर ये टिप्पणियां सुनाइ दे जाती थी।
यह सत्य है कि वह नवयुवक  कभी धार्मिक स्थलों पर अपना सिर झुकाने या प्रवचन सुनने नहीं गया। अगर कहीं जाता है, तो वह है, खेल का मैदान।
- खेलने के अतिरिक्त इसे कुछ सूझता ही नहीं । यह तो घोर नास्तिक है।''
एक और टिप्पणी।
एक दिन उस नवयुवक ने इन टिप्पणियों का उतर दे दिया।
कार्यक्रम मे भाग लेने जा रहे थे। वही मन्दिर के पास धूप में एक दुर्बल गाय बीमार पडी थी । दो तीन कुते गाय को घेरे खडे थे। एक दो लोगो ने कुतों को भगाया। कुते फिर आ जाते ।
तभी वह नवयुवक अपने साथियों के साथ वहा से गुजरा तो उस कि घावों का उपचार किया। चारे पानी कि व्यवस्था की। उस दिन नवयुवक अपना खेल छोड़कर गाय के पास बैठ गया। दूसरी तरफ  अब भी मन्दिर मे कथा सुननेलोग जा रहे थे।

पता - वीपीओ बगीचा,तहसील रायसिंह नगर, जिला - श्री गंगानगर,( राजस्थान)

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