इस अंक में :

इस अंक में पढ़े : शेषनाथ प्रसाद का आलेख :मुक्तिबोध और उनकी कविताओं का काव्‍यतत्‍व, डॉ. गिरीश काशिद का शोध लेख '' दलित चेतना के कथाकार : विपिन बिहारी, डॉ. गोविंद गुंडप्‍पा शिवशिटृे का शोध लेख '' स्‍त्री होने की व्‍यथा ' गुडि़या - भीतर - गुडि़या ', शोधार्थी आशाराम साहू का शोध लेख '' भारतीय रंगमंच में प्रसाद के नाटकों का योगदान '' हरिभटनागर की कहानी '' बदबू '', गजानन माधव मुक्तिबोध की कहानी '' क्‍लॅड ईथरली '' अंजना वर्मा की कहानी '' यहां - वहां, हर कहीं '' शंकर पुणतांबेकर की कहानी '' चित्र '' धर्मेन्‍द्र निर्मल की छत्‍तीसगढ़ी कहानी '' मंतर '' अटल बिहारी बाजपेयी की गीत '' कवि, आज सुनाओ वह गान रे '' हरिवंश राय बच्‍चन की रचना ,ईश्‍वर कुमार की छत्‍तीसगढ़ी गीत '' मोला सुनता अउ सुमत ले '' मिलना मलरिहा के छत्‍तीसगढ़ी गीत '' छत्‍तीसगढ़ी लदका गे रे '' रोजलीन की कविता '' वह सुबह कब होगी '' संतोष श्रीवास्‍तव ' सम ' की कविता '' दो चिडि़यां ''

शनिवार, 13 जुलाई 2013

आ ... क, थूँ ... ह

कविता


-  सुरेन्द्र अंचल -

आ ... क, थूँ ....ह
अरे, हवा के झोंको में
यह सड़े मांस की गंध
कहां से ?
आ ... क, थूँ ... ह
निठारी में मासूमों का
मांस सड़ रहा
बदबू दबा रहा है कौन ?
कौन पिशाच  यह ?
कोख धधक रही मुलक की
कैसी ... धूं धूं
आ ... क, थूँ ... ह।
नसीराबाद में,
कन्याओं का खून चूसता
निर्भय खुल कर
कौन पिशाच यह?
बोलो पहरुओं,
मानवता के माथे यह टीका -
काला, किससे लगवाया
भोपाल का गहराया वह
कड़वा धूंवा नहीं छितराया
कि कारगिल की शांत
धरा को किसने पैने नखूनों से
नोच नोच कर खून बहाया
गजब हो गया।
देश की संसद बोखलाई,
संविधान की धड़कन
यो आतँकित क्यों ?
घृणा की इस वीभत्स हवस पर
थूकेंगी
सदी इक्कीसवीं थूं ... थू ... थू ...।
आ ... क, थूँ ... ह
  • पता - 2/152, साकेत नगर, ब्यावर अजमेर, राजस्थान

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