इस अंक में :

डॉ. रवीन्‍द्र अग्निहोत्री का आलेख '' हिन्‍दी एक उपेक्षित क्षेत्र '' प्रेमचंद का आलेख '' साम्‍प्रदायिकता एवं संस्‍कृति '' भीष्‍म साहनी की कहानी '' झूमर '' सत्‍यनारायण पटेल की कहानी '' पनही '' अर्जुन प्रसाद की कहानी '' तलाक '' जयंत साहू की छत्‍तीसगढ़ी कहानी '' परसार '' गिरीश पंकज का व्‍यंग्‍य '' भ्रष्‍ट्राचार के खिलाफ अपुन '' कुबेर का व्‍यंग्‍य '' नो अपील, नो वकील, घोषणापत्र '' गीत गजल कविता

शुक्रवार, 5 जुलाई 2013

महंगाई के सुरसा



कांशीपुरी कुंदन
लीलत हे सब ल मंहगई के सुरसा
हिरदे के पीरा ल बतांव ग
मोर कोन दुख ल गोठियावं ग।

घर हा लेसावथे अइसे म कइसे
आगी ल गांव के बुतांव ग।

मय अव गोड़तरिया के सपना
काकर मुड़सरिया ल जांव ग।

जम्मो लफरहा मन नेता लहुटगे
मय बइठे - बइठे पछतांव ग।

सब्बो बतियाए के लाइक निकलथे
काला में मुड़ी म चढ़ाव ग।

लीलत हे सब ल मंहगाई के सुरसा
कइसे परवार ल बचांव ग।

मय तो उजियारी के बेटा अव संगी
खोजथव सुरुज के गांव ग।
  • पता - अध्यक्ष, पं. रविशंकर शुक्ल सद्भाव साहित्य समिति, राजिम, जिला - गरियाबंद  (छ.ग.)

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