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सोमवार, 15 जुलाई 2013

मुक्‍तक

मुक्‍तक

- विजय राठौर  -

तीर होता कमान होती है,
वीर की जैसे जान होती है।
तुम मेरी रुह में यूं रहती हो,
जिस्म में जैसे जान होती है।
चाह के ताल में उतर जायें,
देख कर ही हृदय को गरमायें।
जीने की बात करते - करते हम,
तेरी बॉकी अदा में मर जायें।

दिल के सारे सवाल हल कर दो,
सारे झगड़े बवाल हल कर दो।
दिल से जब चाहते हो मिलना तो,
बीच के अंतराल हल कर दो।
व्यर्थ में क्यों उदास होना है,
हमको तो पास - पास होना है।
सन्धि में क्यों फंसें अकारण ही,
हमको तुमको समास होना है।

प्यार करने के लिए डूबेंगे,
जीने - मरने के लिए डूबेंगे।
प्यार तो आग का दरिया है मगर,
हम उभरने के लिए डूबेंगे।
कौन कहता है कुछ बदी होगी,
वह तो लज्जा से ही लदी होगी।
पलकें जब - तब उफान लेती है,
उसकी आँखों में इक नदी होगी।

बांछें खिलती हुई जवानी हो,्र
प्यार की गुनगुनी कहानी हो।
ये तभी छाप अपनी छोड़ेंगे
जबकि आँखों में खारा पानी हो।
प्यार मधुमास मांगता होगा,
प्यार भुजपाश मांगता होगा।
प्यार जो मांगता है शाश्वत है
प्यार विश्वास मांगता होगा।

जबसे तुममें प्रवित्त हो बैठा,
बड़ा अशांत चित्त हो बैठा।
पूरी दुनिया ही व्यर्थ लगती है,
जैसे जग से निवृत्त हो बैठा।
रात भर मैं विरह में तपता हूं,
ताप से रोम - रोम कंपता हूं।
जाने ये रात कटेगी कैसे
रात भर राम - राम जपता हूं।

प्यार को प्यार से ही जीतोगे,
मीठी मनुहार से ही जीतोगे
तुमने कैसे समझ लिया पागल,
प्यार तकरार से ही जीतोगे।
प्रीत की हर अदा निराली है,
प्रीत सीता है आम्रपाली है।
प्रीत के रुप हजारों देखे
प्रीत गोरी न काली है।
पता - गट्टानी कन्या उच्च. मा. शा. के सामने, अकलतरा रोड,
जांजगीर, जिला - जांजगीर चाम्पा ( छ.ग. )मोबाईल - 98261 - 15660

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