इस अंक में :

इस अंक में पढ़े : शेषनाथ प्रसाद का आलेख :मुक्तिबोध और उनकी कविताओं का काव्‍यतत्‍व, डॉ. गिरीश काशिद का शोध लेख '' दलित चेतना के कथाकार : विपिन बिहारी, डॉ. गोविंद गुंडप्‍पा शिवशिटृे का शोध लेख '' स्‍त्री होने की व्‍यथा ' गुडि़या - भीतर - गुडि़या ', शोधार्थी आशाराम साहू का शोध लेख '' भारतीय रंगमंच में प्रसाद के नाटकों का योगदान '' हरिभटनागर की कहानी '' बदबू '', गजानन माधव मुक्तिबोध की कहानी '' क्‍लॅड ईथरली '' अंजना वर्मा की कहानी '' यहां - वहां, हर कहीं '' शंकर पुणतांबेकर की कहानी '' चित्र '' धर्मेन्‍द्र निर्मल की छत्‍तीसगढ़ी कहानी '' मंतर '' अटल बिहारी बाजपेयी की गीत '' कवि, आज सुनाओ वह गान रे '' हरिवंश राय बच्‍चन की रचना ,ईश्‍वर कुमार की छत्‍तीसगढ़ी गीत '' मोला सुनता अउ सुमत ले '' मिलना मलरिहा के छत्‍तीसगढ़ी गीत '' छत्‍तीसगढ़ी लदका गे रे '' रोजलीन की कविता '' वह सुबह कब होगी '' संतोष श्रीवास्‍तव ' सम ' की कविता '' दो चिडि़यां ''

बुधवार, 10 जुलाई 2013

भारतीय दलित साहित्य अकादमी द्वारा

आकांक्षा यादव को डॉ. अम्बेडकर फेलोशिप राष्ट्रीय सम्मान 2011

भारतीय दलित साहित्य अकादमी ने युवा कवयित्री साहित्यकार एवं चर्चित ब्लागर आकांक्षा यादव को डा0 अम्बेडकर फेलोशिप राष्ट्रीय सम्मान2011 से सम्मानित किया है। आकांक्षा यादव को यह सम्मान साहित्य सेवा एवं सामाजिक कार्यों में रचनात्मक योगदान के लिए प्रदान किया गया है। उक्त सम्मान भारतीय दलित साहित्य अकादमी द्वारा 11 - 12 दिसंबर को दिल्ली में आयोजित 27 वें राष्ट्रीय दलित साहित्यकार सम्मलेन में केंद्रीय मंत्री फारुख अब्दुल्ला द्वारा प्रदान किया गया।
गौरतलब है कि आकांक्षा यादव की रचनाएँ देश - विदेश की शताधिक पत्रपत्रिकाओं में नियमित रूप से प्रकाशित हो रही हैं। नारी विमर्श बाल विमर्श एवं सामाजिक सरोकारों सम्बन्धी विमर्श में विशेष रूचि रखने वाली आकांक्षा यादव के लेख कवितायेँ और लघुकथाएं जहाँ तमाम संकलनो पुस्तकों की शोभा बढ़ा रहे हैं वहीँ आपकी तमाम रचनाएँ आकाशवाणी से भी तरंगित हुई हैं। पत्रपत्रिकाओं के साथसाथ अंतर्जाल पर भी सक्रिय आकांक्षा यादव की रचनाएँ इंटरनेट पर तमाम वेबसाईट,पत्रिकाओं और ब्लॉगों पर भी पढ़ी देखी जा सकती हैं। व्यक्तिगत रूप से शब्दशिखर और युगल रूप में बालदुनिया, सप्तरंगी प्रेम व उत्सव के रंग ब्लॉग का संचालन करने वाली आकांक्षा यादव न सिर्फ एक साहित्यकार के रूप में प्रतिष्ठित हैं बल्कि सक्रिय ब्लागर के रूप में भी उन्होंने अपनी विशिष्ट पहचान बनाई है। मूलत: उत्तर प्रदेश के आजमगढ़ और गाजीपुर जनपद की निवासी आकांक्षा यादव वर्तमान में अपने पतिदेव श्री कृष्ण कुमार यादव के साथ अंडमाननिकोबार में रह रही हैं और वहां रहकर भी हिंदी को समृद्ध कर रही हैं श्री यादव भी हिंदी की युवा पीढ़ी के सशक्त हस्ताक्षर हैं और सम्प्रति अंडमाननिकोबार द्वीप समूह के निदेशक डाक सेवाएँ पद पर पदस्थ हैं। इससे पूर्व भी आकांक्षा यादव को विभिन्न साहित्यिक सामाजिक संस्थानों द्वारा सम्मानित किया जा चुका है। जिसमें भारतीय दलित साहित्य अकादमी द्वारा वीरांगना सावित्रीबाई फुले फेलोशिप सम्मान, राष्ट्रीय राजभाषा पीठ इलाहाबाद द्वारा भारती ज्योति,एस0एम0एस0 कविता पर प्रभात प्रकाशन नई दिल्ली द्वारा पुरस्कार। इन्द्रधनुष साहित्यिक संस्थाए बिजनौर द्वारा साहित्य गौरव व काव्य मर्मज्ञ,श्री मुकुन्द मुरारी स्मृति साहित्यमाला कानपुर द्वारा साहित्य श्री सम्मान मथुरा की साहित्यिकसांस्कृतिक संस्था आसरा द्वारा ब्रज.शिरोमणि सम्मान मध्यप्रदेश नवलेखन संघ द्वारा साहित्य मनीषी सम्मान,भाषा भारती रत्न छत्तीसगढ़ शिक्षक साहित्यकार मंच द्वारा साहित्य सेवा सम्मान,देवभूमि साहित्यकार मंच पिथौरागढ़ द्वारा देवभूमि साहित्य रत्न, राजेश्वरी प्रकाशन गुना द्वारा उजास सम्मान ऋचा रचनाकार परिषद कटनी द्वारा भारत गौरव अभिव्यंजना संस्थाए कानपुर द्वारा काव्य कुमुद, ग्वालियर साहित्य एवं कला परिषद द्वारा शब्द माधुरी, महिमा प्रकाशन दुर्ग.छत्तीसगढ द्वारा महिमा साहित्य भूषण सम्मान इत्यादि शामिल हैं।

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