इस अंक में :

डॉ. रवीन्‍द्र अग्निहोत्री का आलेख '' हिन्‍दी एक उपेक्षित क्षेत्र '' प्रेमचंद का आलेख '' साम्‍प्रदायिकता एवं संस्‍कृति '' भीष्‍म साहनी की कहानी '' झूमर '' सत्‍यनारायण पटेल की कहानी '' पनही '' अर्जुन प्रसाद की कहानी '' तलाक '' जयंत साहू की छत्‍तीसगढ़ी कहानी '' परसार '' गिरीश पंकज का व्‍यंग्‍य '' भ्रष्‍ट्राचार के खिलाफ अपुन '' कुबेर का व्‍यंग्‍य '' नो अपील, नो वकील, घोषणापत्र '' गीत गजल कविता

शुक्रवार, 5 जुलाई 2013

सुर मिला ले




-  श्रीमती सुधा शर्मा  -

आओ सुर मिला लें, गा रही माँ भारती
मन का दीपक जला लें, आज उतारे आरती।
अभिनंदन करता तिरंगा, छू रहा है आसमां
जन गण मन से अवगुजिंत, हो उठा सारा जहाँ
स्वर लहरी गूंजे जहाँ में, सप्त सुर है संवारती
आओ हम सुर मिला लें, गा रही माँ भारती।
जल रही है आज भी, धू - धू शहीदों की चिताएं
मातृभूमि की अस्मिता, के खातिर जो मर मिटे
स्मृतियों के पट खोल लें, गा रही माँ भारती।
जागते रहो लाडलों, माँ का ये आह्वान है
पहनो केसरिया बाना, तिरंगा परिधान है
अमन चैन रहे चमन में, बस यही पुकारती
आओ हम सुर मिला लें, गा रही माँ भारती।
अब मिटा सके ना हमें, आये कोई आंधियाँ
हम बना ले एकता का, ऐसा मजबूत आशियाँ
कर्मपथ पर सपूतों को सदा निहारती
आओ हम सुर मिला लें, गा रही माँ भारती।
कौन किसको है रुलाता, कौन बहाता रक्त है
कठिन परीक्षा आई है, आया ये कैसा वक्त है
कुपित हो जाए माँ तो, खड्ग फिर ये संवारती
आओ हम सुर मिला लें, गा रही माँ भारती।
  
पता - ब्राम्हण पारा, राजिम, जिला - रायपुर(छ.ग.)

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