इस अंक में :

डॉ. रवीन्‍द्र अग्निहोत्री का आलेख '' हिन्‍दी एक उपेक्षित क्षेत्र '' प्रेमचंद का आलेख '' साम्‍प्रदायिकता एवं संस्‍कृति '' भीष्‍म साहनी की कहानी '' झूमर '' सत्‍यनारायण पटेल की कहानी '' पनही '' अर्जुन प्रसाद की कहानी '' तलाक '' जयंत साहू की छत्‍तीसगढ़ी कहानी '' परसार '' गिरीश पंकज का व्‍यंग्‍य '' भ्रष्‍ट्राचार के खिलाफ अपुन '' कुबेर का व्‍यंग्‍य '' नो अपील, नो वकील, घोषणापत्र '' गीत गजल कविता

मंगलवार, 10 सितंबर 2013

ब्रम्‍ह्रम भोज

- शोभा रस्तोगी ' शोभा' -
आज शुक्ला जी के घर ब्रह्मभोज था ।  मृत्यु  उपरांत किया जाने वाला भोज  ।  दो साल से शुक्लाजी अकेले रह रहे थे  । आर्थराइटिस व डाईबीटीस से पीड़ित  ।  तीनों बेटों को फुर्सत नहीं थी आकर हाल भी पूछने की ।  मृत्यु की सूचना पाते ही तीनों ने आकर दाहकर्म किया  ।  तेरह  दिन रूक कर इस विशाल मकान को प्रोपर्टी डीलर के हाथों बेच दिया  ।  लाखों हाथ आये  ।  तीन हिस्से बँट गए  ।  उसी में से थोडा ब्रह्मभोज में लगा दिया ।  पंडित व बिरादरी के लोग तारीफ  कर रहे थे   वाह ! क्या ब्रह्मभोज था ! दिल खोल कर पिता की आत्मा को तृप्त किया है ।
वाकई  ब्रह्मभोज बहुत बढ़िया था।
पता - आर जेड,208 बी,डीडीए पार्क रोड, राजनगर 2, पालम कालोनी
नई दिल्ली

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