इस अंक में :

मनोज मोक्षेन्‍द्र का आलेख '' सार्थक व्यंग्य के आवश्यक है व्यंग्यात्मक कटाक्षों की सर्वत्रता '', डॉ. माणिक विश्‍वकर्मा '' नवरंग '' का शोध लेख '' हिन्दी गज़ल का इतिहास एवं छंद विधान: हिन्दी की'',रविन्‍द्र नाथ टैगोर की कहानी '' सीमांत '', मनोहर श्‍याम जोशी की कहानी '' उसका बिस्‍तर '', कहानी ( अनुवाद उडि़या से हिन्दी)'' अनसुलझी''मूल लेखिका:सरोजनी साहू अनुवाद:दिनेश कुमार शास्त्री, छत्तीसगढ़ी कहिनी'' फोंक - फोंक ल काटे म नई बने बात'' लेखक:ललित साहू' जख्मी', बाल कहानी '' अनोखी तरकीब''''मेंढक और गिलहरी'' रचनाकार पराग ज्ञान देव चौधरी,सुशील यादव का व्यंग्य '' मन रे तू काहे न धीर धरे'', त्रिभुवन पांडेय का व्‍यंग्‍य ''ललित निबंध होली पर'',गीत- गजल- कविता: रचनाकार :खुर्शीद अनवर' खुर्शीद',श्याम'अंकुर',महेश कटारे'सुगम',जितेन्द्र'सुकुमार',विवेक चतुर्वेदी,सुशील यादव, संत कवि पवन दीवान,रोज़लीन,डॉ. जीवन यदु, टीकेश्वर सिन्हा'गब्दीवाला, बृजभूषण चतुर्वेदी 'बृजेश', पुस्तक समीक्षा:'' इतिहास बोध से वर्तमान विसंगतियों पर प्रहार'' समीक्षा : एम. एम. चन्द्रा'', ''मौन मंथन: एक समीक्षा''समीक्षा''मंगत रवीन्द्र,''जल की धारा बहती रहे''समीक्षा : डॉ. अखिलेश कुमार'शंखधर'

मंगलवार, 10 सितंबर 2013

ब्रम्‍ह्रम भोज

- शोभा रस्तोगी ' शोभा' -
आज शुक्ला जी के घर ब्रह्मभोज था ।  मृत्यु  उपरांत किया जाने वाला भोज  ।  दो साल से शुक्लाजी अकेले रह रहे थे  । आर्थराइटिस व डाईबीटीस से पीड़ित  ।  तीनों बेटों को फुर्सत नहीं थी आकर हाल भी पूछने की ।  मृत्यु की सूचना पाते ही तीनों ने आकर दाहकर्म किया  ।  तेरह  दिन रूक कर इस विशाल मकान को प्रोपर्टी डीलर के हाथों बेच दिया  ।  लाखों हाथ आये  ।  तीन हिस्से बँट गए  ।  उसी में से थोडा ब्रह्मभोज में लगा दिया ।  पंडित व बिरादरी के लोग तारीफ  कर रहे थे   वाह ! क्या ब्रह्मभोज था ! दिल खोल कर पिता की आत्मा को तृप्त किया है ।
वाकई  ब्रह्मभोज बहुत बढ़िया था।
पता - आर जेड,208 बी,डीडीए पार्क रोड, राजनगर 2, पालम कालोनी
नई दिल्ली

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