इस अंक में :

इस अंक में पढ़े : ( आलेख )तनवीर का रंग संसार :महावीर अग्रवाल,( आलेख )सुन्दरलाल द्विजराज नाम हवै : प्रो. अश्विनी केशरवानी, ( आलेख )छत्‍तीसगढ़ी हाना – भांजरा : सूक्ष्‍म भेद- संजीव तिवारी,( आलेख )लील न जाए निशाचरी अवसान : डॉ्. दीपक आचार्य,( कहानी )दिल्‍ली में छत्‍तीसगढ़ : कैलाश बनवासी ,( कहानी )खुले पंजोंवाली चील : बलराम अग्रवाल,( कहानी ) खिड़की : चन्‍द्रमोहन प्रधान,( कहानी ) गोरखधंधा :हरीश कुमार अमित,( व्‍यंग्‍य )फलना जगह के डी.एम: कुंदन कुमार ( व्‍यंग्‍य )हर शाख पे उल्लू बैठा है, अन्जामे - गुलिश्ता क्या होगा ?: रवीन्‍द्र प्रभात, (छत्‍तीसगढ़ी कहानी) गुरुददा : ललितदास मानिकपुरी, लघुकथाएं, कविताएं..... ''

मंगलवार, 10 सितंबर 2013

ब्रम्‍ह्रम भोज

- शोभा रस्तोगी ' शोभा' -
आज शुक्ला जी के घर ब्रह्मभोज था ।  मृत्यु  उपरांत किया जाने वाला भोज  ।  दो साल से शुक्लाजी अकेले रह रहे थे  । आर्थराइटिस व डाईबीटीस से पीड़ित  ।  तीनों बेटों को फुर्सत नहीं थी आकर हाल भी पूछने की ।  मृत्यु की सूचना पाते ही तीनों ने आकर दाहकर्म किया  ।  तेरह  दिन रूक कर इस विशाल मकान को प्रोपर्टी डीलर के हाथों बेच दिया  ।  लाखों हाथ आये  ।  तीन हिस्से बँट गए  ।  उसी में से थोडा ब्रह्मभोज में लगा दिया ।  पंडित व बिरादरी के लोग तारीफ  कर रहे थे   वाह ! क्या ब्रह्मभोज था ! दिल खोल कर पिता की आत्मा को तृप्त किया है ।
वाकई  ब्रह्मभोज बहुत बढ़िया था।
पता - आर जेड,208 बी,डीडीए पार्क रोड, राजनगर 2, पालम कालोनी
नई दिल्ली

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