इस अंक में :

इस अंक में पढ़े : ( आलेख )तनवीर का रंग संसार :महावीर अग्रवाल,( आलेख )सुन्दरलाल द्विजराज नाम हवै : प्रो. अश्विनी केशरवानी, ( आलेख )छत्‍तीसगढ़ी हाना – भांजरा : सूक्ष्‍म भेद- संजीव तिवारी,( आलेख )लील न जाए निशाचरी अवसान : डॉ्. दीपक आचार्य,( कहानी )दिल्‍ली में छत्‍तीसगढ़ : कैलाश बनवासी ,( कहानी )खुले पंजोंवाली चील : बलराम अग्रवाल,( कहानी ) खिड़की : चन्‍द्रमोहन प्रधान,( कहानी ) गोरखधंधा :हरीश कुमार अमित,( व्‍यंग्‍य )फलना जगह के डी.एम: कुंदन कुमार ( व्‍यंग्‍य )हर शाख पे उल्लू बैठा है, अन्जामे - गुलिश्ता क्या होगा ?: रवीन्‍द्र प्रभात, (छत्‍तीसगढ़ी कहानी) गुरुददा : ललितदास मानिकपुरी, लघुकथाएं, कविताएं..... ''

बुधवार, 4 सितंबर 2013

कुंडलियां - हरप्रसाद ' निडर '

हरप्रसाद ' निडर '
शकरकंद म शक्कर अस, छत्तीसगढ़ के गोठ।
बांस भोजली भड़ौनी, गीत ददरिया पोठ॥
गीत ददरिया पोठ, मिठाथे ठोली - बोली।
सबे जगा सुन ले, का घर का बहरा डोली॥
कहे निडर कबिराय, छत्तीसगढ़ी सुखकंद।
सब कांदा के बड़े ददा जइसे शकरकंद॥

छत्तीसगढ़ ह उगलत हे, चना मटर भरपूर।
हीरवा बटरा बटरी, गजामून्ग मसूर॥
गजामून्ग मसूर, तेल सरसो अरसी के।
किसिम किसिम के दार, रहर बेल्या उरदी के॥
कहे निडर कबिराय, अकरी तिवरा अड़बड़।
महर - महर बगराय, दुनिया ले छत्तीसगढ़॥

खदान के छोटे बड़े, खनिज इहां भंडार।
जाल मेकरा कोइला, सोन गड़े गंगार॥
सोन गड़े गंगार, सिल्वर पथरा के आरा।
लोहा पीतल कांस, भरे हे अभरक पारा॥
कहे निडर कबिराय, रजत रंग छुही चटान।
कुधरा जघा - जघा म, मिल जाही मुरूम खदान॥

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