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इस अंक में पढ़े : ( आलेख )तनवीर का रंग संसार :महावीर अग्रवाल,( आलेख )सुन्दरलाल द्विजराज नाम हवै : प्रो. अश्विनी केशरवानी, ( आलेख )छत्‍तीसगढ़ी हाना – भांजरा : सूक्ष्‍म भेद- संजीव तिवारी,( आलेख )लील न जाए निशाचरी अवसान : डॉ्. दीपक आचार्य,( कहानी )दिल्‍ली में छत्‍तीसगढ़ : कैलाश बनवासी ,( कहानी )खुले पंजोंवाली चील : बलराम अग्रवाल,( कहानी ) खिड़की : चन्‍द्रमोहन प्रधान,( कहानी ) गोरखधंधा :हरीश कुमार अमित,( व्‍यंग्‍य )फलना जगह के डी.एम: कुंदन कुमार ( व्‍यंग्‍य )हर शाख पे उल्लू बैठा है, अन्जामे - गुलिश्ता क्या होगा ?: रवीन्‍द्र प्रभात, (छत्‍तीसगढ़ी कहानी) गुरुददा : ललितदास मानिकपुरी, लघुकथाएं, कविताएं..... ''

गुरुवार, 12 सितंबर 2013

तैं अउ मैं चल..

मुकुंद कौशल
 तैं अउ मैं चल घाम के छौना कस मड़ियाबोन वो।
दिन भर कहुँचो बइठ के हरहिन्छा गोठियाबोन वो॥

    साँझ खँजेरी धरे हाथ मा
    बिहना धरे तमूरा
    समय के डमरू बाजत हावय
    मनखे बने जमूरा
झुमर - झुमर बेरा सँग बाजा हमूं बजाबोन वो।
छिन भर कहुँचो बइठ के हरहिन्छा गोठियाबोन वो॥

    बिन सूरूज के जग अॅंधियारी
    बिन परेम के दुनिया
    बिना बजाए मया - पिरित के
    नइ बाजै हरमुनिया
आज संग नइ गा पाएन ते अउ कब गाबोनवो।
छिन भर कहुँचो बइठ के हरहिन्छा गोठियाबोन वो॥

    जीयत आँसू मरे मं आँसू
    आँसू आनी जानी
    जतका हाँसी ठटï्ठा हे सब
    आँसू लिखे कहानी
हाँस - हाँस के दुख - पीरा ला हम बिजराबोन वो।
छिन भर कहुँचो बइठ के हरहिंछा गोठियाबोन वो॥
 एम - 516 पद्ïमनाभपुर
दुर्ग 6 छग. 8

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