इस अंक में :

इस अंक में पढ़े : ( आलेख )तनवीर का रंग संसार :महावीर अग्रवाल,( आलेख )सुन्दरलाल द्विजराज नाम हवै : प्रो. अश्विनी केशरवानी, ( आलेख )छत्‍तीसगढ़ी हाना – भांजरा : सूक्ष्‍म भेद- संजीव तिवारी,( आलेख )लील न जाए निशाचरी अवसान : डॉ्. दीपक आचार्य,( कहानी )दिल्‍ली में छत्‍तीसगढ़ : कैलाश बनवासी ,( कहानी )खुले पंजोंवाली चील : बलराम अग्रवाल,( कहानी ) खिड़की : चन्‍द्रमोहन प्रधान,( कहानी ) गोरखधंधा :हरीश कुमार अमित,( व्‍यंग्‍य )फलना जगह के डी.एम: कुंदन कुमार ( व्‍यंग्‍य )हर शाख पे उल्लू बैठा है, अन्जामे - गुलिश्ता क्या होगा ?: रवीन्‍द्र प्रभात, (छत्‍तीसगढ़ी कहानी) गुरुददा : ललितदास मानिकपुरी, लघुकथाएं, कविताएं..... ''

रविवार, 15 सितंबर 2013

सारे बेदर्द ख़यालात : चांदनी पांडे

चांदनी पांडे
सारे बेदर्द ख़यालात रुके नहीं कब से।
सूने - सूने से ये हालात रुके नहीं कब से।

ये समंदर भी मेरी प्यास से कमतर निकला,
तिश्नगी के मेरे ज़ज्बात रुके हैं कब से।

आशियाने को बचाने में कसर क्या छोड़ी?
दिल के कोने में सवालत रुके हैं कब से।

यक - ब - यक तुमसे मुलाक़ात के दिलकश लम्हें,
बाद उसके सभी लम्हात रुकें हैं कब से।

चांदनी से है मिरासिम में अंधेरी रात,
और उजालों के ये सौगात रुके हैं कब से।
पता :
13 सी 3, चंद्रा नगर, जगईपुरा,
राजेन्द्र आटा चक्की के पास लाल बंगला , कानपुर  (उ.प्र.)  208007,
मोबाईल : 08896758559

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