इस अंक में :

डॉ. रवीन्‍द्र अग्निहोत्री का आलेख '' हिन्‍दी एक उपेक्षित क्षेत्र '' प्रेमचंद का आलेख '' साम्‍प्रदायिकता एवं संस्‍कृति '' भीष्‍म साहनी की कहानी '' झूमर '' सत्‍यनारायण पटेल की कहानी '' पनही '' अर्जुन प्रसाद की कहानी '' तलाक '' जयंत साहू की छत्‍तीसगढ़ी कहानी '' परसार '' गिरीश पंकज का व्‍यंग्‍य '' भ्रष्‍ट्राचार के खिलाफ अपुन '' कुबेर का व्‍यंग्‍य '' नो अपील, नो वकील, घोषणापत्र '' गीत गजल कविता

गुरुवार, 12 सितंबर 2013

माढ़े पानी ह नइ गावय , खल - भल - खल - भल गाना

जीवन य दु
जीय त - जागत मनखे बर जे, धरम बरोबर होथय  ।
एक साँस आजादी के सौ - जनम बरोबर होथय  ।
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जेकर चेथी मं जूड़ा कस , माढ़े रथे गुलामी ,
जेन जोहारे बइरी मन ल, घोलंड के लामा - लामी,
नाँव ले जादा जग मं ओकर, होथे गा बदनामी,
अइसन मनखे के जिनगी, बेसरम बरोबर होथय  ।
एक साँस आजादी के सौ - जनम बरोबर होथय  ।
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लहू के नदिया तउँर निकलथे, बीर ह जतके बेरा,
बेर निकलथे मेट के करिया बादर वाला घेरा,
तभे उसलथे उजियारी ले अंधियारी के डेरा,
सबो परानी बर आजादी, करम बरोबर होथय  ।
एक साँस आजादी के सौ - जनम बरोबर होथय  ।
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जेला नइ हे आजादी के, एकोकनी चि न्हारी,
पर के कोठा के  बइला मन च रथँय  ओकर बारी,
आजादी के बासी आगू बिरथा सोनहा थारी,
सोन के पिंêरा मं आजादी, भरम बरोबर होथय  ।
एक साँस आजादी के सौ - जनम बरोबर होथय  ।
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माढ़े पानी ह नइ गावय , खल - भल - खल - भल गाना,
बिना नहर उपजाय  न बाँधा, खेत मं एको दाना ,
अपन गोड़ के बंधना छोरय , ओला मिलय  ठिकाना,
आजादी ह सब बिकास के, मरम बरोबर होथय  ।
एक साँस आजादी के सौ - जनम बरोबर होथय  ।
कहे नइ पायेवँ अउ का बेरा आगे ?( जुद्ध अउ प्रेम के संदभर् में )
धरती कस सुन्दर हस तँय  ह संगवारी,
आने सुन्दरता ह लागय  लबारी -
- कहे नइ पायेवँ अउ का बेरा आगे ?
धरती के छाती ह बम ले कुच रागे ।

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    मनखे के भीतर जब जागिस जिनावर,
    माँस के पहाड़ खोजयँ, लहू के चि तावर,
    हो गे भसान सही गाँव - देस - बस्ती,
    मन मं कइसे गहसे परसा अउ गस्ती ?

महमहाये तन - मन तोर, जइसे फुलवारी,
साँस ह लगे तोर बिन मोला लबारी -
- कहे नइ पायेवँ अउ का बेरा आ गे ?
फूल - पान रूख - राई, जम्मो झंवा गे ।

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    चारों खँुट घटाघोप, छा गे अउ सनाका,
    बरसे गोला - गोली, धाँय  - धुम - धनाका,
    लहू ह बोहावत हे, पानी कस रेला,
    मनखे के कीमत, जस कौड़ी अधेला,
तन हरिय र,  मन हरिय र, उम्मर मोटियारी,
धान के नवा खेत लागय  लबारी -
- कहे नइ पायेवँ अउ का बेरा आ गे ?
धनहा डोली बिन बियासे लुवागे ।

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    हो कोनो रूसी - चीनी अउ इराकी,
    धरती के नाता ले मोर कका - काकी,
    जुद्ध म मरय   कोनो मनखेच  ह मरथेे,
    कोनो घर भसके, मोर भिथिया ओदरथे,
बोली गुलाल, तोर हाँसी पिच कारी,
इन्द्रधनुस रंग लगय  जुच्छा लबारी -
- कहे नइ पायेवँ अउ का बेरा आगे ?
धरती के धुँगिया ले बादर करिया गे ।

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    बरपेली झगरा अउ जुद्ध खेल हो गे ।
    पिकरी कस झगरा ह आज बेल हो गे ।
    देस आने - आने पन धरती हे एके ।
    मया के मयारू दू खंभा मं टेके ।
देखे हवँ जब ले तोर अँगना - दुवारी,
लागय  सरग तब ले मोला लबारी -
कहे नइ पायेवँ अउ का बेरा आगे ?
धरती के फोटू के कोनहा चि रागे ।
गीतिका, दाऊच ौरा
खैरागढ़ (छ.ग.) 

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