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रविवार, 15 सितंबर 2013

चंदन हे मोर देस के माटी

डॉ. मदन देवांगन
चंदन हे मोर देस के माटी, पावन मोर गांव हे ।
बाजय जिंहा धरम के घंटी, तेखर छत्तीसगढ़ नाव हे ।।

होत बिहिनिया खेत जाये, नागर घर के नगरिहा ।
भूमर - भूमर बनिहारिन गावैं, करमा सुआ ददरिया ।
परत जिंहा हे सुरूज देव के, चकमिक पहिली पांव हे ।।

राम असन मर्यादा वाले, कृष्णा करम कबीर हे ।
गांधी सुभास आजाद भगतसिंग, आजादी के रनधीर हे ।
गंगा जमुना के निरमल पानी में, ममता मया के छांव हे ।।

अनधन - गियान गीत उपजइया, माटी कोयला पथरा ।
साधु संत तपसी के धरती, सुख शांति अंचरा ।
प्रेम सांति भाईचारा, हमर इही भाव हे ।।

चंदन हे मोर देस के माटी, पावन मोर गांव हे ।
बाजय जिंहा धरम के घंटी, तेखर छत्तीसगढ नाव हे ।।
पता : राजा परपोड़ी, दुर्ग  (छ .ग.)
साभार : गुरतुर गोठ

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