इस अंक में :

डॉ. रवीन्‍द्र अग्निहोत्री का आलेख '' हिन्‍दी एक उपेक्षित क्षेत्र '' प्रेमचंद का आलेख '' साम्‍प्रदायिकता एवं संस्‍कृति '' भीष्‍म साहनी की कहानी '' झूमर '' सत्‍यनारायण पटेल की कहानी '' पनही '' अर्जुन प्रसाद की कहानी '' तलाक '' जयंत साहू की छत्‍तीसगढ़ी कहानी '' परसार '' गिरीश पंकज का व्‍यंग्‍य '' भ्रष्‍ट्राचार के खिलाफ अपुन '' कुबेर का व्‍यंग्‍य '' नो अपील, नो वकील, घोषणापत्र '' गीत गजल कविता

रविवार, 15 सितंबर 2013

चंदन हे मोर देस के माटी

डॉ. मदन देवांगन
चंदन हे मोर देस के माटी, पावन मोर गांव हे ।
बाजय जिंहा धरम के घंटी, तेखर छत्तीसगढ़ नाव हे ।।

होत बिहिनिया खेत जाये, नागर घर के नगरिहा ।
भूमर - भूमर बनिहारिन गावैं, करमा सुआ ददरिया ।
परत जिंहा हे सुरूज देव के, चकमिक पहिली पांव हे ।।

राम असन मर्यादा वाले, कृष्णा करम कबीर हे ।
गांधी सुभास आजाद भगतसिंग, आजादी के रनधीर हे ।
गंगा जमुना के निरमल पानी में, ममता मया के छांव हे ।।

अनधन - गियान गीत उपजइया, माटी कोयला पथरा ।
साधु संत तपसी के धरती, सुख शांति अंचरा ।
प्रेम सांति भाईचारा, हमर इही भाव हे ।।

चंदन हे मोर देस के माटी, पावन मोर गांव हे ।
बाजय जिंहा धरम के घंटी, तेखर छत्तीसगढ नाव हे ।।
पता : राजा परपोड़ी, दुर्ग  (छ .ग.)
साभार : गुरतुर गोठ

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