इस अंक में :

डॉ. रवीन्‍द्र अग्निहोत्री का आलेख '' हिन्‍दी एक उपेक्षित क्षेत्र '' प्रेमचंद का आलेख '' साम्‍प्रदायिकता एवं संस्‍कृति '' भीष्‍म साहनी की कहानी '' झूमर '' सत्‍यनारायण पटेल की कहानी '' पनही '' अर्जुन प्रसाद की कहानी '' तलाक '' जयंत साहू की छत्‍तीसगढ़ी कहानी '' परसार '' गिरीश पंकज का व्‍यंग्‍य '' भ्रष्‍ट्राचार के खिलाफ अपुन '' कुबेर का व्‍यंग्‍य '' नो अपील, नो वकील, घोषणापत्र '' गीत गजल कविता

बुधवार, 4 सितंबर 2013

तुम्‍हारी मुस्‍कुराहट

डाँ नथमल झंवर
तुम नहीं जानती
तुम्हारी मुस्कुराहट से
जाने कितने जन्मों का रिश्ता है मेरा ?


जब भी तुम्हारी मुस्कुराहट
मेरे होठों पर
अपनी ऊंगलियां फेरती है
तब न जाने
कितने वर्षों की याद
तरोताजा हो जाती है
मेरे जेहन पर
बाग - बाग हो जाता हूं -
तब मैं


तुम्हारी मुस्कुराहट
मेरे सीने पर
जब करती है
कोमल स्पशर्
मेर अंतस का प्यार
छलक पड़ता है तब
अनायास ही
याद आ जाता है
हम दोनों का प्रथम मिलन


मेरे मन की वीणा में
तुम्हारी मुस्कुराहट के तार
जब झंकृत हो उठते हैं
तब झूम उठता है मेरा पोर - पोर
संगीतमय  हो जाता है
सारा वातावरण
दसों दिशाएं


और तब तुम्हारी मुस्कराहट
मुझे ले जाती है
उन वादियों में
जहां हम दोनों का प्यार
पला था
कसमें खाई थी
हम दोनों ने
साथ निभाने की
जन्म - जन्मान्तर तक
और तब
मेरी भी मुस्कुराहट
समाहित हो जाती है
तुम्हारी मुस्कुराहट में
एकाकार हो जाती है
तब दोनों

झंवर निवास
मेन रोड, सिमगा,
जिला- राय पुर (छग.)

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