इस अंक में :

इस अंक में पढ़े : ( आलेख )तनवीर का रंग संसार :महावीर अग्रवाल,( आलेख )सुन्दरलाल द्विजराज नाम हवै : प्रो. अश्विनी केशरवानी, ( आलेख )छत्‍तीसगढ़ी हाना – भांजरा : सूक्ष्‍म भेद- संजीव तिवारी,( आलेख )लील न जाए निशाचरी अवसान : डॉ्. दीपक आचार्य,( कहानी )दिल्‍ली में छत्‍तीसगढ़ : कैलाश बनवासी ,( कहानी )खुले पंजोंवाली चील : बलराम अग्रवाल,( कहानी ) खिड़की : चन्‍द्रमोहन प्रधान,( कहानी ) गोरखधंधा :हरीश कुमार अमित,( व्‍यंग्‍य )फलना जगह के डी.एम: कुंदन कुमार ( व्‍यंग्‍य )हर शाख पे उल्लू बैठा है, अन्जामे - गुलिश्ता क्या होगा ?: रवीन्‍द्र प्रभात, (छत्‍तीसगढ़ी कहानी) गुरुददा : ललितदास मानिकपुरी, लघुकथाएं, कविताएं..... ''

बुधवार, 4 सितंबर 2013

खेले बचपन

शशिलता लहरे
माँ के गाँव में,
पीपल के छाँव में।
ममता के आँचल में,
बारिस के पानी में
झूमें तन मन
खेले बचपन में।
मिटï्टी के घरौंदे में,
खेले हम खिलौने में।
बचपन की मस्ती में
कागज की कस्ती में
गुजारे जीवन,
खेले बचपन में।
बापू के हाथ में,
जीवन गुजारे साथ में।
भाई बहनों के प्यार में
मिठी सी तकरार में।
भुलाए तन - मन
खेले बचपन में।
चप्पल नहीं पांव में
मरहम नहीं घाव में।
देखे सपना आँखों में
गुम हुआ बचपन यादों में।
गुजारे जीवन
खेले बचपन में।
मु.पो. - मालखरौदा
तहसील - मालखरौदा
जिला - जांजगीर  - चाम्पा ( छग.) 

कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें