इस अंक में :

डॉ. रवीन्‍द्र अग्निहोत्री का आलेख '' हिन्‍दी एक उपेक्षित क्षेत्र '' प्रेमचंद का आलेख '' साम्‍प्रदायिकता एवं संस्‍कृति '' भीष्‍म साहनी की कहानी '' झूमर '' सत्‍यनारायण पटेल की कहानी '' पनही '' अर्जुन प्रसाद की कहानी '' तलाक '' जयंत साहू की छत्‍तीसगढ़ी कहानी '' परसार '' गिरीश पंकज का व्‍यंग्‍य '' भ्रष्‍ट्राचार के खिलाफ अपुन '' कुबेर का व्‍यंग्‍य '' नो अपील, नो वकील, घोषणापत्र '' गीत गजल कविता

बुधवार, 4 सितंबर 2013

खेले बचपन

शशिलता लहरे
माँ के गाँव में,
पीपल के छाँव में।
ममता के आँचल में,
बारिस के पानी में
झूमें तन मन
खेले बचपन में।
मिटï्टी के घरौंदे में,
खेले हम खिलौने में।
बचपन की मस्ती में
कागज की कस्ती में
गुजारे जीवन,
खेले बचपन में।
बापू के हाथ में,
जीवन गुजारे साथ में।
भाई बहनों के प्यार में
मिठी सी तकरार में।
भुलाए तन - मन
खेले बचपन में।
चप्पल नहीं पांव में
मरहम नहीं घाव में।
देखे सपना आँखों में
गुम हुआ बचपन यादों में।
गुजारे जीवन
खेले बचपन में।
मु.पो. - मालखरौदा
तहसील - मालखरौदा
जिला - जांजगीर  - चाम्पा ( छग.) 

कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें