इस अंक में :

इस अंक में पढ़े : ( आलेख )तनवीर का रंग संसार :महावीर अग्रवाल,( आलेख )सुन्दरलाल द्विजराज नाम हवै : प्रो. अश्विनी केशरवानी, ( आलेख )छत्‍तीसगढ़ी हाना – भांजरा : सूक्ष्‍म भेद- संजीव तिवारी,( आलेख )लील न जाए निशाचरी अवसान : डॉ्. दीपक आचार्य,( कहानी )दिल्‍ली में छत्‍तीसगढ़ : कैलाश बनवासी ,( कहानी )खुले पंजोंवाली चील : बलराम अग्रवाल,( कहानी ) खिड़की : चन्‍द्रमोहन प्रधान,( कहानी ) गोरखधंधा :हरीश कुमार अमित,( व्‍यंग्‍य )फलना जगह के डी.एम: कुंदन कुमार ( व्‍यंग्‍य )हर शाख पे उल्लू बैठा है, अन्जामे - गुलिश्ता क्या होगा ?: रवीन्‍द्र प्रभात, (छत्‍तीसगढ़ी कहानी) गुरुददा : ललितदास मानिकपुरी, लघुकथाएं, कविताएं..... ''

बुधवार, 11 सितंबर 2013

सुरहोती के दीया बरगे

देवलाल सिन्हा
सुरहोती के दीया बरगे,
अंजोर होगे गली खोर।
आही अंगना मं लक्षमी दाई, जगर - बगर घर कुरिया हे।
धान हरहूना मिंजागे भइया, माई लकठा नई धुरिहा हे॥
दिन बुड़गे, मुंधियार परगे, दीया बरगे चारो ओर।
सुरहोती के दीया बरगे, अंजोर होगे गली खोर॥
दूसर दिन देवारी के मानय, बहिनी मन हा भाई दूज।
चाऊंर चंदन माथे म टीके चरन ल धोके पीये दूद॥
बहिनी के बीपत हटगे, राखी म लेबे काहय सोर।
सुरहोती के दीया बरगे,अंजोर होगे गली खोर॥
गऊ माता ल खिचरी खवाये, घरो घर चूरे कोहड़ा कोचई।
हांका पारे बरदीहा मन अऊ, गाय ल बांधय ओहा सोहई॥
कोसटऊंहा धोती परगे, हाना गहीश गावय जोर।
सुरहोती के दीया बरगे,अंजोर होगे गली खोर॥
मातर होय खइरखा डांड़ म घोन्डईया काछन मारत हे।
कुकरा ल छोंड़े बीच खरखा म, गइया खुर मारत हे॥
खुंडहर मेर दीया  हूम धरके, मान म नरियर देवय फोर।
सुरहोती के दीया बरगे, अंजोर होगे गली खोर॥
इतवारी बाजार, खैरागढ़, जिला - राजनांदगांव ( छ.ग.)

कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें