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इस अंक में पढ़े : शेषनाथ प्रसाद का आलेख :मुक्तिबोध और उनकी कविताओं का काव्‍यतत्‍व, डॉ. गिरीश काशिद का शोध लेख '' दलित चेतना के कथाकार : विपिन बिहारी, डॉ. गोविंद गुंडप्‍पा शिवशिटृे का शोध लेख '' स्‍त्री होने की व्‍यथा ' गुडि़या - भीतर - गुडि़या ', शोधार्थी आशाराम साहू का शोध लेख '' भारतीय रंगमंच में प्रसाद के नाटकों का योगदान '' हरिभटनागर की कहानी '' बदबू '', गजानन माधव मुक्तिबोध की कहानी '' क्‍लॅड ईथरली '' अंजना वर्मा की कहानी '' यहां - वहां, हर कहीं '' शंकर पुणतांबेकर की कहानी '' चित्र '' धर्मेन्‍द्र निर्मल की छत्‍तीसगढ़ी कहानी '' मंतर '' अटल बिहारी बाजपेयी की गीत '' कवि, आज सुनाओ वह गान रे '' हरिवंश राय बच्‍चन की रचना ,ईश्‍वर कुमार की छत्‍तीसगढ़ी गीत '' मोला सुनता अउ सुमत ले '' मिलना मलरिहा के छत्‍तीसगढ़ी गीत '' छत्‍तीसगढ़ी लदका गे रे '' रोजलीन की कविता '' वह सुबह कब होगी '' संतोष श्रीवास्‍तव ' सम ' की कविता '' दो चिडि़यां ''

बुधवार, 11 सितंबर 2013

सुरहोती के दीया बरगे

देवलाल सिन्हा
सुरहोती के दीया बरगे,
अंजोर होगे गली खोर।
आही अंगना मं लक्षमी दाई, जगर - बगर घर कुरिया हे।
धान हरहूना मिंजागे भइया, माई लकठा नई धुरिहा हे॥
दिन बुड़गे, मुंधियार परगे, दीया बरगे चारो ओर।
सुरहोती के दीया बरगे, अंजोर होगे गली खोर॥
दूसर दिन देवारी के मानय, बहिनी मन हा भाई दूज।
चाऊंर चंदन माथे म टीके चरन ल धोके पीये दूद॥
बहिनी के बीपत हटगे, राखी म लेबे काहय सोर।
सुरहोती के दीया बरगे,अंजोर होगे गली खोर॥
गऊ माता ल खिचरी खवाये, घरो घर चूरे कोहड़ा कोचई।
हांका पारे बरदीहा मन अऊ, गाय ल बांधय ओहा सोहई॥
कोसटऊंहा धोती परगे, हाना गहीश गावय जोर।
सुरहोती के दीया बरगे,अंजोर होगे गली खोर॥
मातर होय खइरखा डांड़ म घोन्डईया काछन मारत हे।
कुकरा ल छोंड़े बीच खरखा म, गइया खुर मारत हे॥
खुंडहर मेर दीया  हूम धरके, मान म नरियर देवय फोर।
सुरहोती के दीया बरगे, अंजोर होगे गली खोर॥
इतवारी बाजार, खैरागढ़, जिला - राजनांदगांव ( छ.ग.)

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