इस अंक में :

मनोज मोक्षेन्‍द्र का आलेख '' सार्थक व्यंग्य के आवश्यक है व्यंग्यात्मक कटाक्षों की सर्वत्रता '', डॉ. माणिक विश्‍वकर्मा '' नवरंग '' का शोध लेख '' हिन्दी गज़ल का इतिहास एवं छंद विधान: हिन्दी की'',रविन्‍द्र नाथ टैगोर की कहानी '' सीमांत '', मनोहर श्‍याम जोशी की कहानी '' उसका बिस्‍तर '', कहानी ( अनुवाद उडि़या से हिन्दी)'' अनसुलझी''मूल लेखिका:सरोजनी साहू अनुवाद:दिनेश कुमार शास्त्री, छत्तीसगढ़ी कहिनी'' फोंक - फोंक ल काटे म नई बने बात'' लेखक:ललित साहू' जख्मी', बाल कहानी '' अनोखी तरकीब''''मेंढक और गिलहरी'' रचनाकार पराग ज्ञान देव चौधरी,सुशील यादव का व्यंग्य '' मन रे तू काहे न धीर धरे'', त्रिभुवन पांडेय का व्‍यंग्‍य ''ललित निबंध होली पर'',गीत- गजल- कविता: रचनाकार :खुर्शीद अनवर' खुर्शीद',श्याम'अंकुर',महेश कटारे'सुगम',जितेन्द्र'सुकुमार',विवेक चतुर्वेदी,सुशील यादव, संत कवि पवन दीवान,रोज़लीन,डॉ. जीवन यदु, टीकेश्वर सिन्हा'गब्दीवाला, बृजभूषण चतुर्वेदी 'बृजेश', पुस्तक समीक्षा:'' इतिहास बोध से वर्तमान विसंगतियों पर प्रहार'' समीक्षा : एम. एम. चन्द्रा'', ''मौन मंथन: एक समीक्षा''समीक्षा''मंगत रवीन्द्र,''जल की धारा बहती रहे''समीक्षा : डॉ. अखिलेश कुमार'शंखधर'

मंगलवार, 10 सितंबर 2013

बिरछा ल झन काट

- पीसीलाल यादव  -
बिरछा ल बचा ले मितान... सिरतोन गउ ईमान,
तैं बिरछा ल झन काट रे, तैं बिरछा ल झन कांट बंधुवा
बिरछा तो आय भगवान, सिखोथे ग किसान
तैं बिरछा ल झन काट रे ...।
रूख राई रहि तब तो बादर ह बरसही
नई ते दुनिया ह पानी बिना तरसही
रुख हवय तभे तो चलत हवय सांसा
जीयत हे जीव - जन्तु, जीयत हवय आसा।
बिरछा तो आय हमर जान, तैं झन हो बेईमान।
तैं बिरछा ल झन काट रे ...।
कार्बन डाइआक्साइड ल लेथे अपन मन
फूल - फर देथे हमला, देथे गा आक्सीजन।
दुनिया म भला कोन हवय जी अइसन?
महुरा ल पी के अपन, देथे पर ल जीवन।
पेड़ ह बचाये ग परान, तैं कर ओखर गुमान
तैं बिरछा ल झन काट रे ...।
बिरछा बचा के जग - जिनगी ल बचा ले
नवा पीढ़ी बर कुछु तो पुन तैं कमा ले
हरियर डोंगरी - पहार, हरियर खेत - खार
बिरछा तो आय संगी जिनगी के सिंगार
कहिथे जी वेद अउ पुरान, कर पुरखा के मान
तैं बिरछा ल झन काट रे ...।
आमा अमली, बर पीपर, सरई - सईगोना
कउहा - मउहा तेंदू - चार, अमरीत के दोना
चिरई - चिरगुन फुदक के, गाथे डारा- डारा
दाई- ददा कस पेड़ हवय, जिनगी के सहारा
बिरछा तो आय हमर मान,करथे ग कल्यान
तैं बिरछा ल झन काट रे ...।
साहित्य कुटीर, गंडई पंडरिया, जिला -राजनांदगांव छ.ग.

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