इस अंक में :

इस अंक में पढ़े : ( आलेख )तनवीर का रंग संसार :महावीर अग्रवाल,( आलेख )सुन्दरलाल द्विजराज नाम हवै : प्रो. अश्विनी केशरवानी, ( आलेख )छत्‍तीसगढ़ी हाना – भांजरा : सूक्ष्‍म भेद- संजीव तिवारी,( आलेख )लील न जाए निशाचरी अवसान : डॉ्. दीपक आचार्य,( कहानी )दिल्‍ली में छत्‍तीसगढ़ : कैलाश बनवासी ,( कहानी )खुले पंजोंवाली चील : बलराम अग्रवाल,( कहानी ) खिड़की : चन्‍द्रमोहन प्रधान,( कहानी ) गोरखधंधा :हरीश कुमार अमित,( व्‍यंग्‍य )फलना जगह के डी.एम: कुंदन कुमार ( व्‍यंग्‍य )हर शाख पे उल्लू बैठा है, अन्जामे - गुलिश्ता क्या होगा ?: रवीन्‍द्र प्रभात, (छत्‍तीसगढ़ी कहानी) गुरुददा : ललितदास मानिकपुरी, लघुकथाएं, कविताएं..... ''

बुधवार, 4 सितंबर 2013

बोलो जगदीश्‍वर

आनंद तिवारी पौराणिक
सृजन, पलय
  जन्म, विलय
खोलो रहस्य परमेश्वर
  बोलो जगदीश्वर
हो जगन्नाथ
  पर जग में कितने अनाथ
दु: ख इनको जनम भर
  बोलो जगदीश्वर
तुम विश्वम्भर
  भूखे लाखों घर
करूणा भी रोती परमेश्वर
  बोलो जगदीश्वर
विश्वपति तुम्हें बताएँ
फिर क्यों इतनी विधवाएँ
  क्या है प्रत्युत्तर
  बोलो जगदीश्वर
पाषाण मूर्त्ति तुम्हीं ने उबारे
पर खुद पस्तर रूप धरे
आओगे कब चिन्मय रूप लेकर
  बोलो जगदीश्वर
स्वार्थ, घृणा, अन्धकार
  व्याया, पीड़ा, भरमार
शेष नहीं कोई घर
  बोलो जगदीश्वर
हे पूर्ण ज्योति, सुन्दरतम
जग में नहीं कुरूपता कम
क्यों हँसते दु: ख देकर
  बोलो जगदीश्वर ?
श्रीराम टाकीज मार्ग,महासमुंद ( छ.ग.)

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