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गुरुवार, 12 सितंबर 2013

मनखे

गणेश यदु
जग म जम्मों जीव ले, मनखे बुधमान हे।
इही बात के मनखे ल, गजबेहेच्च गुमान हे॥

एकरे सेती मनखे ह, मनखे संग भेद करथे।
फेर मिल जुल के रहे बिना, ए समाज समसान हे॥

एला जानत हें, समझत हें, जान के अनजान हें।
कोन अल्ला ए, कोन यीशु अउ कोन भगवान ए॥

तभो ले आंखी म बाँधें हें, सुवारथ के टोपा।
इही पाय के मनखे ह, जबरन हलाकान हे॥

जेन दिन मनखे के आँखी ले ए टोपा उतर जाही।
मनखे ह मनखे बर सहीं म मनखे बन जाही॥

इही दिन के अगोरा हे, ए दुनिया म यदु।
मनखे ह मनखेपन के मरजाद ल पा जाही॥
संबलपुर, जिला - कांकेर

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