इस अंक में :

डॉ. रवीन्‍द्र अग्निहोत्री का आलेख '' हिन्‍दी एक उपेक्षित क्षेत्र '' प्रेमचंद का आलेख '' साम्‍प्रदायिकता एवं संस्‍कृति '' भीष्‍म साहनी की कहानी '' झूमर '' सत्‍यनारायण पटेल की कहानी '' पनही '' अर्जुन प्रसाद की कहानी '' तलाक '' जयंत साहू की छत्‍तीसगढ़ी कहानी '' परसार '' गिरीश पंकज का व्‍यंग्‍य '' भ्रष्‍ट्राचार के खिलाफ अपुन '' कुबेर का व्‍यंग्‍य '' नो अपील, नो वकील, घोषणापत्र '' गीत गजल कविता

बुधवार, 11 सितंबर 2013

चलो गीत प्यार का गाएं

डिहुर राम निर्वाण
चलो गीत प्यार का गाएं, मन में उसे बसाये ।
स्वर से स्वर मिलाकर ,आपस में प्यार सजायें ॥
    बगिया में कूके कोयलिया,
    सुन मन उमंग भर लायें ॥
    अली का गुंजन सुन लिया,
    तितली फूल से मन रसाये ॥
चलो गीत प्यार का गाएं मन में रस बरसायें ।
पतझर पर नव कोपल लाकर नव बाहर सजायें ॥
    मंद सुगंध पवन भी बहकर,
    रजनी मुख पर ,हेम किरण लायें ।
    जन जीवन में घोल प्रेम पर
    नव जीवन अलख जगायें ॥
चलो गीत प्यार के गाएं,मन को भी सरसायें ।
जीवन की बगियाँ सजाकर,प्रेमामृत बहायें ॥
    स्वर गुंजन में विहंग वृन्द भी,
    अपने सबके संग दुलरायें ।
    जगती के सब चर - अचर भी,
    अवनि अम्बर में सुख पाये ॥
चलो गीत प्यार के गाएं, सबसे गले मिलायें ।
चहक उठेंगे समता पर, ऐसा मन अपनायें ॥
स्मृति कुटीर
भैसमुण्डी मगरलोड
पो. आ. मगरलोड, जिला - धमतरी ( छ.ग.)

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