इस अंक में :

इस अंक में पढ़े : शेषनाथ प्रसाद का आलेख :मुक्तिबोध और उनकी कविताओं का काव्‍यतत्‍व, डॉ. गिरीश काशिद का शोध लेख '' दलित चेतना के कथाकार : विपिन बिहारी, डॉ. गोविंद गुंडप्‍पा शिवशिटृे का शोध लेख '' स्‍त्री होने की व्‍यथा ' गुडि़या - भीतर - गुडि़या ', शोधार्थी आशाराम साहू का शोध लेख '' भारतीय रंगमंच में प्रसाद के नाटकों का योगदान '' हरिभटनागर की कहानी '' बदबू '', गजानन माधव मुक्तिबोध की कहानी '' क्‍लॅड ईथरली '' अंजना वर्मा की कहानी '' यहां - वहां, हर कहीं '' शंकर पुणतांबेकर की कहानी '' चित्र '' धर्मेन्‍द्र निर्मल की छत्‍तीसगढ़ी कहानी '' मंतर '' अटल बिहारी बाजपेयी की गीत '' कवि, आज सुनाओ वह गान रे '' हरिवंश राय बच्‍चन की रचना ,ईश्‍वर कुमार की छत्‍तीसगढ़ी गीत '' मोला सुनता अउ सुमत ले '' मिलना मलरिहा के छत्‍तीसगढ़ी गीत '' छत्‍तीसगढ़ी लदका गे रे '' रोजलीन की कविता '' वह सुबह कब होगी '' संतोष श्रीवास्‍तव ' सम ' की कविता '' दो चिडि़यां ''

मंगलवार, 10 सितंबर 2013

चिंगारियां

मोहम्‍मद बशीर मालेरकोटलवी
वह टकटकी बांधे, मुस्कुराती हुई नजरों से मेरी ओर खामोशी से देखता रहा और अपने खास अंदाज में इधर - उधर हिलता भी रहा। कोई जवाब न पाकर मेरा हौसला बढ़ा। मैं फिर बरसा - दरअसल, तुम लोगों को आराम की खाने की आदत पड़ गयी है। सौ - पचास मांग लिया और नशा कर लिया। बस मांगों और खाओ ... करके खाना बहुत मुश्किल है।
मेरी बात खत्म हुई तो वह कुछ संजीदा हो गया और आर्शीर्वाद देने के अंदाज में हाथ उठाकर बुलन्द आवाज में बोला - बस बोल लिए जितना बोलना था ...। थूक निगल कर और आँखें झपका कर वह तकरीबन चिल्ला उठा - सेठ, अगर मेरा काम इतना ही आसान समझता है तो आ बाहर निकल और भगवान के नाम पर दो रुपया मांग कर दिखा ....।
राजकीय पंजाब वक्फ बोर्ड, अधिकारी दिल्ली गेट,
समीप - एम पी स्कूल, मालेरकोटला, पंजाब - 148023

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