इस अंक में :

इस अंक में पढ़े : ( आलेख )तनवीर का रंग संसार :महावीर अग्रवाल,( आलेख )सुन्दरलाल द्विजराज नाम हवै : प्रो. अश्विनी केशरवानी, ( आलेख )छत्‍तीसगढ़ी हाना – भांजरा : सूक्ष्‍म भेद- संजीव तिवारी,( आलेख )लील न जाए निशाचरी अवसान : डॉ्. दीपक आचार्य,( कहानी )दिल्‍ली में छत्‍तीसगढ़ : कैलाश बनवासी ,( कहानी )खुले पंजोंवाली चील : बलराम अग्रवाल,( कहानी ) खिड़की : चन्‍द्रमोहन प्रधान,( कहानी ) गोरखधंधा :हरीश कुमार अमित,( व्‍यंग्‍य )फलना जगह के डी.एम: कुंदन कुमार ( व्‍यंग्‍य )हर शाख पे उल्लू बैठा है, अन्जामे - गुलिश्ता क्या होगा ?: रवीन्‍द्र प्रभात, (छत्‍तीसगढ़ी कहानी) गुरुददा : ललितदास मानिकपुरी, लघुकथाएं, कविताएं..... ''

मंगलवार, 10 सितंबर 2013

इलाज

- विष्णु नागर -
एक मां अपने छह साल के बच्चे को लेकर डॉक्टर के पास गई।
उसने डॉक्टर से कहा- वैसे तो मेरा बच्चा स्वस्थ - प्रसन्न है। खूब दूध पीता है, डंटकर खाना खाता है। छककर मिठाई खाता है। मु_ी भर - भरकर नमकीन खाता है। जी भर खेलता है। मेहनत से पढ़ता है। रंग ला दो तो ढेरों पेटिंग बनाकर रख देता है। सुरीला गाना गाता है। खूब खुश रहता है। लेकिन एक समस्या है। यह कोकाकोला - पेप्सी नहीं पीता,नेस्ले की चाकलेट नहीं खाता। होस्टेस की पोटेटो चिप्स नहीं खाता। लिओ के खिलौने नहीं खेलता। मैंगी के नूडल्स नहीं खाता। डॉल्ट्स की आइसक्रीम नहीं खाता। पता नहीं इसे क्या बीमारी है। मैं बहुत परेशान हूँ डॉक्टर साहब।
डॉक्टर साहब भी चक्कर में। ऐसा केस पहले कभी नहीं आया था। उन्होंने बच्चे का सीना - पेट पीठ - दाँत - मुँह - आँख- नाखून सब देख लिए। टट्टी पेशाब का रंग भी पूछ लिया। दिन में कितनी बार जाता है। यह भी जान लिया। एक्सरे ले लिया। सब ठीक था। लेकिन आसामी बड़ा था। डॉक्टर मरीज को यों ही हाथ से जाने देना नहीं चाहता था।
वह सोचता रहा, सोचता रहा। अचानक उसने पूछा - यह टीवी और वीडियो देखता है?
माँ ने कहा - डॉक्टर साहब, मैं हड़बड़ी में यह बताना ही भूल गई कि यह टीवी और वीडियो नहीं देखता। इस बात से तो मैं सबसे ज्यादा परेशान हूँ।
डॉक्टर ने जवाब दिया - चिंता मत कीजिए। मैं इसे टीवी और वीडियो देखने का सात दिन का कोर्स देता हूँ। आपको तीसरे दिन से बच्चे की हालत में सुधार नजर आएगा।

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