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गुरुवार, 12 सितंबर 2013

मोर आंखी के पुतरी तैंहा

डाँ पीसी लाल यादव 
न तोर बिन रेहे सकवँ ग, न कोनो ल कहे सकवँ ग ।
मोर आंखी के पुतरी तैंहा, न तोर बिन देखे सकवँ ग ।।

        होबे कखरो बर अलवा - जलवा,
        फेर मोर बर तो नीक अस ।
        होबे ककरो बर करू करेला,
        मोर बर तो कुंदरू मीठ अस ।।
न मैं लुकाय  सकवँ ग, न कहूं ल बताय  सकवँ ग ।
मोर आंखी के पुतरी तैंहा, न तोर बिन देखे सकवँ ग ।।

        मैं तो लगाय  हँवजिनगी ल,
        बैरी तोर मया के दाँव म ।
        आसा तिस्ना सााध पूरही,
        फूलही तोर मया के छाँव म ।।
न चुप रेहे सकवँ ग, न मुच  - मुच  हंसे सकवँ ग ।
मोर आंखी के पुतरी तैंहा, न तोर बिन देखे सकवँ ग ।।

        दिल के दरद ल नई जानय  तैंहा,
        मोर मयारू मीठ लबरा ।
        मया के मरम नई जानय  तैंहा,
        तोर चोला ह कठवा - पथरा ।।
न सुध बिसारे सकवँ ग,न बुध तियारे सकवँ ग ।
मोेर आंखी के पुतरी तैंहा, न तोर बिन देखे सकवँ ग ।।
गंडई पंडरिया
जिला -राजनांदगांव (छग.)

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