इस अंक में :

डॉ. रवीन्‍द्र अग्निहोत्री का आलेख '' हिन्‍दी एक उपेक्षित क्षेत्र '' प्रेमचंद का आलेख '' साम्‍प्रदायिकता एवं संस्‍कृति '' भीष्‍म साहनी की कहानी '' झूमर '' सत्‍यनारायण पटेल की कहानी '' पनही '' अर्जुन प्रसाद की कहानी '' तलाक '' जयंत साहू की छत्‍तीसगढ़ी कहानी '' परसार '' गिरीश पंकज का व्‍यंग्‍य '' भ्रष्‍ट्राचार के खिलाफ अपुन '' कुबेर का व्‍यंग्‍य '' नो अपील, नो वकील, घोषणापत्र '' गीत गजल कविता

मंगलवार, 10 सितंबर 2013

( बरसा गीत ) छिहीं - छिहीं ...

जीवन य दु
छिहीं - छिहीं चेंदरी उतार के,
मोटियारी सहीं पाटी पार के -
धरती पहिरे हे हरिय र लुगा - कोसटउँहा ।
    बेलबेलही टुरी सही नदिया बेलबेलाय ,
    तरिया - कुँआ, खोच का - खाबा जमों के मन भाय ,
    पानी भरे मरकी असन उलंडगे च उमास,
    जेठ मा गजब सहे रहिस भुइँँया मोर पियास,
नाँँव धरवँ का नदिया के चाल के,
नागिन रेगय  जीब ल निकाल के,
दिखय  नरवा हा बिखनिन हवय  जइसे गउँँहा ।
    सिटिर - सिटिर कभू गिरय , कभू मूसर धार,
    भउजी के हे पाँव ह भारी, कइसे जाही खार,
    घर के खेती पाके हवय , बन के हा हरियाय ,
    तभे भइया दउड़ - दउड़ के घरे कोती आय ,
नवा - नवा खेत, नवा धान हे,
नवा - नवा खेती अउ किसान हे,
नवा भउजी के गुरतुर मया जइसे मउँहा ।
    बादर करय  साहूकारी, ऊपर ले गुरार्य ,
    डर मा तेकर सूरूज ददा मुहुँँ ल लुकाय ,
    टिपिर - टिपिर छानी चूहय  रेला धरे धार,
    घर ले बने खोर हा दिखय , धोये कस दुवार,
इती - उती खपरा ल टार के,
छाये हवन खदर ल उझार के,
फिलगे गिदगिद ले घर तभो ले पटउँहा ।
गीतिका, दाऊच ौरा खैरागढ़, जिला - राजनांदगांव (छ.ग.)
    मोबाइल - 94254 - 17747

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