इस अंक में :

डॉ. रवीन्‍द्र अग्निहोत्री का आलेख '' हिन्‍दी एक उपेक्षित क्षेत्र '' प्रेमचंद का आलेख '' साम्‍प्रदायिकता एवं संस्‍कृति '' भीष्‍म साहनी की कहानी '' झूमर '' सत्‍यनारायण पटेल की कहानी '' पनही '' अर्जुन प्रसाद की कहानी '' तलाक '' जयंत साहू की छत्‍तीसगढ़ी कहानी '' परसार '' गिरीश पंकज का व्‍यंग्‍य '' भ्रष्‍ट्राचार के खिलाफ अपुन '' कुबेर का व्‍यंग्‍य '' नो अपील, नो वकील, घोषणापत्र '' गीत गजल कविता

बुधवार, 4 सितंबर 2013

दो गीतिकाएं - रमेशचन्‍द्र शर्मा ' चन्‍द्र '

रमेश चन्द्र शर्मा ' चन्द्र '     
सूरज का अपमान कर रहे
ढीठ तिमिर का गान कर रहे
नगर - नगर में बसे संपेरे
सर्पों का विषदान कर रहे
बहुत दिनों से हमसे रूठे
हम उनका अभिमान कर रहे
मछली बोली, तट वालों से
देखो, क्या नादान कर रहे ?
देश निकाला देकर सच को
मिथ्या का गुणगान कर रहे
जिनको सौंपा उपवन हमने
आँधी का आव्हान कर रहे
कौन पढ़े अब अच्छी पुस्तक ?
टी. वी. का सम्मान कर रहे
गाँधी बाबा शिष्य तुम्हारे
तुमको ही बलिदान कर रहे
कुँआ हमारे घर आयेगा
प्यासों का आव्हान कर रहे
रात नशीली है
थोड़ी पीली है
बीज अभी रोपो
धरती गीली है
जले, जलाये क्या ?
माचिस सीली है
मन सपने देखे
तबियत ढीली है
सहज नहीं उल्फत
राह कंटीली है
मुद्रायें मोहें
देह लचीली है
रूप सुदर्शन है
दृष्टिï रसीली है
सत्य कहा जब से
नीली पीली है
सरल नहीं मानना
बहुत हठीली है
डी 4, उदय हाउसिंग सोसाइटी, बैजलपुर , अहमदाबाद -380051

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