इस अंक में :

इस अंक में पढ़े : ( आलेख )तनवीर का रंग संसार :महावीर अग्रवाल,( आलेख )सुन्दरलाल द्विजराज नाम हवै : प्रो. अश्विनी केशरवानी, ( आलेख )छत्‍तीसगढ़ी हाना – भांजरा : सूक्ष्‍म भेद- संजीव तिवारी,( आलेख )लील न जाए निशाचरी अवसान : डॉ्. दीपक आचार्य,( कहानी )दिल्‍ली में छत्‍तीसगढ़ : कैलाश बनवासी ,( कहानी )खुले पंजोंवाली चील : बलराम अग्रवाल,( कहानी ) खिड़की : चन्‍द्रमोहन प्रधान,( कहानी ) गोरखधंधा :हरीश कुमार अमित,( व्‍यंग्‍य )फलना जगह के डी.एम: कुंदन कुमार ( व्‍यंग्‍य )हर शाख पे उल्लू बैठा है, अन्जामे - गुलिश्ता क्या होगा ?: रवीन्‍द्र प्रभात, (छत्‍तीसगढ़ी कहानी) गुरुददा : ललितदास मानिकपुरी, लघुकथाएं, कविताएं..... ''

बुधवार, 4 सितंबर 2013

दो गीतिकाएं - रमेशचन्‍द्र शर्मा ' चन्‍द्र '

रमेश चन्द्र शर्मा ' चन्द्र '     
सूरज का अपमान कर रहे
ढीठ तिमिर का गान कर रहे
नगर - नगर में बसे संपेरे
सर्पों का विषदान कर रहे
बहुत दिनों से हमसे रूठे
हम उनका अभिमान कर रहे
मछली बोली, तट वालों से
देखो, क्या नादान कर रहे ?
देश निकाला देकर सच को
मिथ्या का गुणगान कर रहे
जिनको सौंपा उपवन हमने
आँधी का आव्हान कर रहे
कौन पढ़े अब अच्छी पुस्तक ?
टी. वी. का सम्मान कर रहे
गाँधी बाबा शिष्य तुम्हारे
तुमको ही बलिदान कर रहे
कुँआ हमारे घर आयेगा
प्यासों का आव्हान कर रहे
रात नशीली है
थोड़ी पीली है
बीज अभी रोपो
धरती गीली है
जले, जलाये क्या ?
माचिस सीली है
मन सपने देखे
तबियत ढीली है
सहज नहीं उल्फत
राह कंटीली है
मुद्रायें मोहें
देह लचीली है
रूप सुदर्शन है
दृष्टिï रसीली है
सत्य कहा जब से
नीली पीली है
सरल नहीं मानना
बहुत हठीली है
डी 4, उदय हाउसिंग सोसाइटी, बैजलपुर , अहमदाबाद -380051

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