इस अंक में :

इस अंक में पढ़े : शेषनाथ प्रसाद का आलेख :मुक्तिबोध और उनकी कविताओं का काव्‍यतत्‍व, डॉ. गिरीश काशिद का शोध लेख '' दलित चेतना के कथाकार : विपिन बिहारी, डॉ. गोविंद गुंडप्‍पा शिवशिटृे का शोध लेख '' स्‍त्री होने की व्‍यथा ' गुडि़या - भीतर - गुडि़या ', शोधार्थी आशाराम साहू का शोध लेख '' भारतीय रंगमंच में प्रसाद के नाटकों का योगदान '' हरिभटनागर की कहानी '' बदबू '', गजानन माधव मुक्तिबोध की कहानी '' क्‍लॅड ईथरली '' अंजना वर्मा की कहानी '' यहां - वहां, हर कहीं '' शंकर पुणतांबेकर की कहानी '' चित्र '' धर्मेन्‍द्र निर्मल की छत्‍तीसगढ़ी कहानी '' मंतर '' अटल बिहारी बाजपेयी की गीत '' कवि, आज सुनाओ वह गान रे '' हरिवंश राय बच्‍चन की रचना ,ईश्‍वर कुमार की छत्‍तीसगढ़ी गीत '' मोला सुनता अउ सुमत ले '' मिलना मलरिहा के छत्‍तीसगढ़ी गीत '' छत्‍तीसगढ़ी लदका गे रे '' रोजलीन की कविता '' वह सुबह कब होगी '' संतोष श्रीवास्‍तव ' सम ' की कविता '' दो चिडि़यां ''

सोमवार, 16 सितंबर 2013

पाठकों के पत्र अगस्‍त 2013


बहुत ही स्तरीय पत्रिका है विचार वीथी

विचार वीथी का मई - जुलाई अंक मिला। अंक अच्छा है। मुख्यपृष्ट ही आपके लोक को उभारता है और अंदर की सामग्री पढ़ने को आमंत्रित करता है। छत्तीसगढ़ी भाषा भोजपुरी के कितना निकट है, जिस क्षेत्र का मैं रहवासी हूं यह देखकर बड़ी प्रसन्नता हुई। इसमें आस्कर वाईल्ड की कृति द नाइटिंगल एण्ड द रोज का अनुवाद पढ़कर एक अलग आस्वाद मिला। कुबेर जी बधाई के पात्र है। रचनाओं का चयन पठनीयता के आधार पर कर रहें हैं यह आश्वस्ति की बात है। विचार वीथी बहुत ही स्तरीय पत्रिका है इसमें संदेह नहीं। शुभकामनाओं के साथ।
                    केशव शरण, वाराणसी

संपादकीय अउ कुबेर के छत्तीसगढ़ी अनुवाद मन ल भा गे, बधाई

विचार वीथी मिलिस। संपादकीय पढ़ेंव। छत्तीसगढ़ी भाषा के हो हल्ला के खिलाफ अपन विचार व्यक्त करे हव। सही म आज के जुग म मानकीकरण के बात फिजूल हे। कोन भाषा आज निमगा रही गे हे अउ भाषा ल निमगा रख के कोन तीर मार सके हे?  भाषा बेवहार से स्वरुप धारण करथे। जउन सब्द बोले समझे में सरल होथे वो ह जबान म चढ़ जथे। बोलने वाला कोनो भी भासा के बोलइया राहय। दूसर दूसर भासा ल मिंझारबे त निमगावादी मन खिचाड़ी कहि के हंसी उड़ाथे। उंखरे मन से सवाल हे के बेवहार म का उन खिचड़ी खाय ले अपन आप ल बचा पाथे? खिचड़ी म अगर सुवाद हे त खाय म का के परहेज? एक गुस्ताखी करे के हिम्मत करत हौं काबर के सलाह पठोय के आमंत्रण आपे कोती ले मिले हे। पत्रिका के मंय सुरूच ले प्रसंसक हंव। छत्तीसगढ़ में प्रकाशित हिन्दी के स्तरीय पत्रिका म विचार वीथी के नाव ल कोनो नई भुला सकय। कुबेरके छत्‍तीसगढ़ी अनुवाद मन ल छु दीस। भाई ल बधाई.....।

                    दिनेश चौहान, नवापारा, राजिम

विचार वीथी पढ़कर मन गदगद हो गया

विचार वीथी पढ़कर मन गदगद हो गया। मुझे यह नहीं मालूम था कि छत्तीसगढ़ से इतनी स्तरीय पत्रिका निकलती है। वास्तव में छत्तीसगढ़ विभिन्न मामलों में संपन्न राज्य है। वन सम्पदा, खनिज सम्पदा के साथ ही प्रतिभा संपन्न इस राज्य को किसी की नजर न लगे यही कामना करता हूं। विचार वीथी छत्तीसगढ़ के जनजीवन, संस्कृति के अनुरुप सदैव निकलती रहे यह दिली तमन्ना है।

                    अशोक बजाज, अंधेरी, मुंबई

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