इस अंक में :

इस अंक में पढ़े : ( आलेख )तनवीर का रंग संसार :महावीर अग्रवाल,( आलेख )सुन्दरलाल द्विजराज नाम हवै : प्रो. अश्विनी केशरवानी, ( आलेख )छत्‍तीसगढ़ी हाना – भांजरा : सूक्ष्‍म भेद- संजीव तिवारी,( आलेख )लील न जाए निशाचरी अवसान : डॉ्. दीपक आचार्य,( कहानी )दिल्‍ली में छत्‍तीसगढ़ : कैलाश बनवासी ,( कहानी )खुले पंजोंवाली चील : बलराम अग्रवाल,( कहानी ) खिड़की : चन्‍द्रमोहन प्रधान,( कहानी ) गोरखधंधा :हरीश कुमार अमित,( व्‍यंग्‍य )फलना जगह के डी.एम: कुंदन कुमार ( व्‍यंग्‍य )हर शाख पे उल्लू बैठा है, अन्जामे - गुलिश्ता क्या होगा ?: रवीन्‍द्र प्रभात, (छत्‍तीसगढ़ी कहानी) गुरुददा : ललितदास मानिकपुरी, लघुकथाएं, कविताएं..... ''

मंगलवार, 10 सितंबर 2013

रही तड़पती आँसुओं मे

जितेन्द्र जौहर के दोहे
रही तड़पती आँसुओं में डूबी तहरीर
दिल्ली में पकती रही आश्वासन की खीर

संसद में बिकने लगे खुलेआम ईमान
हमने तो देखी नहीं, इतनी बड़ी दुकान

क्या बतलाऊँ, क्या लिखूँ, राजनीति का हाल
कुर्सी पर काबिज हुए, गुण्डे - चोर - दलाल

ये कैसा कानून है, वाह ... सियासत वाह
खेत गधे मिल खा गये, पकड़े गये जुलाह
आई . आर. 13/6,रेणुसागर, सोनभद्र [उ.प्र.]   

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