इस अंक में :

डॉ. रवीन्‍द्र अग्निहोत्री का आलेख '' हिन्‍दी एक उपेक्षित क्षेत्र '' प्रेमचंद का आलेख '' साम्‍प्रदायिकता एवं संस्‍कृति '' भीष्‍म साहनी की कहानी '' झूमर '' सत्‍यनारायण पटेल की कहानी '' पनही '' अर्जुन प्रसाद की कहानी '' तलाक '' जयंत साहू की छत्‍तीसगढ़ी कहानी '' परसार '' गिरीश पंकज का व्‍यंग्‍य '' भ्रष्‍ट्राचार के खिलाफ अपुन '' कुबेर का व्‍यंग्‍य '' नो अपील, नो वकील, घोषणापत्र '' गीत गजल कविता

मंगलवार, 10 सितंबर 2013

रही तड़पती आँसुओं मे

जितेन्द्र जौहर के दोहे
रही तड़पती आँसुओं में डूबी तहरीर
दिल्ली में पकती रही आश्वासन की खीर

संसद में बिकने लगे खुलेआम ईमान
हमने तो देखी नहीं, इतनी बड़ी दुकान

क्या बतलाऊँ, क्या लिखूँ, राजनीति का हाल
कुर्सी पर काबिज हुए, गुण्डे - चोर - दलाल

ये कैसा कानून है, वाह ... सियासत वाह
खेत गधे मिल खा गये, पकड़े गये जुलाह
आई . आर. 13/6,रेणुसागर, सोनभद्र [उ.प्र.]   

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