इस अंक में :

डॉ. रवीन्‍द्र अग्निहोत्री का आलेख '' हिन्‍दी एक उपेक्षित क्षेत्र '' प्रेमचंद का आलेख '' साम्‍प्रदायिकता एवं संस्‍कृति '' भीष्‍म साहनी की कहानी '' झूमर '' सत्‍यनारायण पटेल की कहानी '' पनही '' अर्जुन प्रसाद की कहानी '' तलाक '' जयंत साहू की छत्‍तीसगढ़ी कहानी '' परसार '' गिरीश पंकज का व्‍यंग्‍य '' भ्रष्‍ट्राचार के खिलाफ अपुन '' कुबेर का व्‍यंग्‍य '' नो अपील, नो वकील, घोषणापत्र '' गीत गजल कविता

बुधवार, 4 सितंबर 2013

नहीं मिला एक आदमी

डां.सुनील कुमार ' तनहा '
कण - कण में भगवान मिले
पर ना मिला एक आदमी।
गली - गली हर डगर - डगर
ढूंढ रहा हूं दर - बदर
नगर वीथियों चौबारों में
औ सत्ता के गलियारों मे
दिन की मुक्त रोशनी हो
या हो रात शबनमीं
कण - कण में ....
शैल पनघट या उपवन
ढूंढ रहा हूं इधर - उधर
योगियों के साधन में
भोगियों के वासना में
क्या पतझर क्या हरीतिमा
गगन हो या जमीं
कण - कण में ...
दीन दुखियों के अश्रुनीर में
ढूंढ रहा हूं प्रचंड पीर में
जन - मन के भाव प्रवचन में
शिशुओं के क्रन्दन रूदन में
रजनी की श्यामल छाँव हो
या हो रात पूनमी
कण - कण में ...
पुष्पगंधा प्रकाशन,
राजमहल चौक, कबीरधाम ( छग. )

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