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मंगलवार, 10 सितंबर 2013

गीतों का सरगम


 आचार्य रमाकांत शर्मा
हर साँँसे गीतों का सरगम ।
ददर् वेदना पीड़ा साथी जिसके हर दम ।

    नय नों के झरते आँँसू ,मोती की माJा ।
    है अJ¨य , अJक्षित वंदित देने वाJा ।
गीतों से ही मिट जायेगा, कृत्रिम सब तम ।
हर साँँसे गीतों का सरगम ।

    जहरीJी हो गई हवाएँँ ।
    स्वांस हीन तन अब यिा गाये  ?
द्वार - द्वार में छिपा हुआ है , नाशवान बारूदी स्वर बम ।
हर साँँसे गीतों का सरगम ।

    पड़ी हुई है सुन्दर काया, ज्यों मिट्टी ढ़ेJा ।
    हा ! हा !! कार में Jगा, आँँसुओं का नव मेJा ।
कितनों को हम Jगा पायेंगे, स्नेहिJ मरहम ।
हर साँँसे गीतों का सरगम ।

    गीत मेरे कुछ बाँट, सकेंगे पीड़ा निक्श्च त ।
    समझूूंगा कुछ किया है मैंने नेक जगत हित ।
अमर बेJ सम फैJा, भ्रýाचार बेसरम ।
हर साँसे गीतों का सरगम ।

    प्रेम स्नेह मानवता तो, मीठा प्रसाद है ।
    जाने वाJा च Jा गया, कुछ नहीं याद है ।
बारूदों पर जीना केवJ मन का है भ्रम ।
हर साँसे गीतों का सरगम ।
छुईखदान,
जिला - राजनांदगांव (छ.ग.)

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