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इस अंक में पढ़े : ( आलेख )तनवीर का रंग संसार :महावीर अग्रवाल,( आलेख )सुन्दरलाल द्विजराज नाम हवै : प्रो. अश्विनी केशरवानी, ( आलेख )छत्‍तीसगढ़ी हाना – भांजरा : सूक्ष्‍म भेद- संजीव तिवारी,( आलेख )लील न जाए निशाचरी अवसान : डॉ्. दीपक आचार्य,( कहानी )दिल्‍ली में छत्‍तीसगढ़ : कैलाश बनवासी ,( कहानी )खुले पंजोंवाली चील : बलराम अग्रवाल,( कहानी ) खिड़की : चन्‍द्रमोहन प्रधान,( कहानी ) गोरखधंधा :हरीश कुमार अमित,( व्‍यंग्‍य )फलना जगह के डी.एम: कुंदन कुमार ( व्‍यंग्‍य )हर शाख पे उल्लू बैठा है, अन्जामे - गुलिश्ता क्या होगा ?: रवीन्‍द्र प्रभात, (छत्‍तीसगढ़ी कहानी) गुरुददा : ललितदास मानिकपुरी, लघुकथाएं, कविताएं..... ''

बुधवार, 4 सितंबर 2013

धरती दाई के कोरा


 गिरधारी लाल चौहान
धरती दाई के कोरा
सुख सुमत के मोरा
नांगर - जांगर सकेलव
अउ हीरा मोती बटोरा ।
ढ़ेला माटी के सेवा
समझव नून बासी मेवा
धिर म हावय  खीर
नई लागे धरे कटोरा ।
कोठी नई छोड़े अढ़िहा
दिन च ल ही बढ़िया - बढ़िया
चि न्ता पेट के नई रही
छूट जाही कनिहा टोरा ।
घर अंगना खोल दुवारी
रूख राई फूल फूलवारी
अपन खातिर लगावा
का रहना पर निहोरा
आस - पड़ोस पहुना पाही
देखा ताका आवा जाही
खाना कमाना रहना बसना
अपनो बर ओसने संजोरा
फुसुन फासन ठेस ठास
होवत रथे नोहे खास
नोहे बुधमानी चुल्हा फोरइ
रोका घर उपजत घर बड़ोरा ।
पोट कमावा, पोट खावा
पहिरा ओढ़ा नाम कमावा
 मानुष तन चार दिनिया
लंदर - फंदर दांत गिजोरा ।
पढ़ा लिखा दुनिया सीखा
करू कस्सा जाना मीठा
एही जनम सबले बड़े
पाकू एकर सब अंजोरा
पड़वाँँ राखव, बइला राखव
गाय  बछरू पोसव पालव
सिरागे च रागन घर म राखा
पाउडर ल झर चि चोरा
नारी पुरूष दुनों कमावा
एक के अकाइस बनावा
ए पुर ओर पुर ल देखा
बात - बात झन ओनहा जोरा ।
ग्राम - छेरकाभाठा, नवापारा खुदर्,
पो. - नन्दौर खुदर्,व्हाया - सिित, जि. - जांजगीर चाम्पा (छ.ग.)

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