इस अंक में :

इस अंक में पढ़े : ( आलेख )तनवीर का रंग संसार :महावीर अग्रवाल,( आलेख )सुन्दरलाल द्विजराज नाम हवै : प्रो. अश्विनी केशरवानी, ( आलेख )छत्‍तीसगढ़ी हाना – भांजरा : सूक्ष्‍म भेद- संजीव तिवारी,( आलेख )लील न जाए निशाचरी अवसान : डॉ्. दीपक आचार्य,( कहानी )दिल्‍ली में छत्‍तीसगढ़ : कैलाश बनवासी ,( कहानी )खुले पंजोंवाली चील : बलराम अग्रवाल,( कहानी ) खिड़की : चन्‍द्रमोहन प्रधान,( कहानी ) गोरखधंधा :हरीश कुमार अमित,( व्‍यंग्‍य )फलना जगह के डी.एम: कुंदन कुमार ( व्‍यंग्‍य )हर शाख पे उल्लू बैठा है, अन्जामे - गुलिश्ता क्या होगा ?: रवीन्‍द्र प्रभात, (छत्‍तीसगढ़ी कहानी) गुरुददा : ललितदास मानिकपुरी, लघुकथाएं, कविताएं..... ''

रविवार, 15 सितंबर 2013

गरजत बरसत ...

रामकुमार साहू ' मयारु '

गरजत बरसत लहुकत हे बादर
आंखी म जइसे आंजे हे काजर
मेचका - झिन्गुरा के गुरतुर बोली
हरियर हरियर, धनहा डोली
बरसे झमाझम, गिरत हे पानी
माते हे किसानी, बइला नांगर
गरजत बरसत लहुकत हे बादर
आंखी म जइसे आंजे हे काजर
सुरूर सुरूर चले पवन पुरवइया
अंगना म फुदरे बाम्भन चिरइया
गली गली बन कुंजन लागे
विधुन होगे एकमन आगर
गरजत बरसत लहुकत हे बादर
आंखी म जइसे आंजे हे काजर
खोर गली म चिखला पानी बोहागे रेला,
कागद के डोंगी बनाय, खेले कोनो घघरइला
सुरुज देवता के परछो नई मिले
कहाँ जाके लुकागे, काबर
गरजत बरसत लहुकत हे बादर
आंखी म जइसे आंजे हे काजर
पता :
ग्राम गिर्रा - पलारी
जिला बलोदा बाजार  (छ .ग .)
9826198219

कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें