इस अंक में :

इस अंक में पढ़े : ( आलेख )तनवीर का रंग संसार :महावीर अग्रवाल,( आलेख )सुन्दरलाल द्विजराज नाम हवै : प्रो. अश्विनी केशरवानी, ( आलेख )छत्‍तीसगढ़ी हाना – भांजरा : सूक्ष्‍म भेद- संजीव तिवारी,( आलेख )लील न जाए निशाचरी अवसान : डॉ्. दीपक आचार्य,( कहानी )दिल्‍ली में छत्‍तीसगढ़ : कैलाश बनवासी ,( कहानी )खुले पंजोंवाली चील : बलराम अग्रवाल,( कहानी ) खिड़की : चन्‍द्रमोहन प्रधान,( कहानी ) गोरखधंधा :हरीश कुमार अमित,( व्‍यंग्‍य )फलना जगह के डी.एम: कुंदन कुमार ( व्‍यंग्‍य )हर शाख पे उल्लू बैठा है, अन्जामे - गुलिश्ता क्या होगा ?: रवीन्‍द्र प्रभात, (छत्‍तीसगढ़ी कहानी) गुरुददा : ललितदास मानिकपुरी, लघुकथाएं, कविताएं..... ''

बुधवार, 4 सितंबर 2013

'' राना लिधौरी '' के हाइकु

  '' राना लिधौरी '' के हाइकु
  1
पर्यावरण
की उथल - पुथल।
महा विनाश।।

                    2
                जल के स्रोत
                जंगल औ बादल।
                जीवन ज्योति।।

     3.
साफ जंगल
नदिया प्रदूषित
कैसे मंगल।।

                     4
                जीवन दवा,
                जल, जमीन, हवा।
                बिकने लगी।।

   5
टेढ़ा नजर
जब प्रकृति की होती।
सब रोते हैं।।
राजीव नामदेव राना लिधौरी
संपादक आकांक्षा पत्रिका
शिवनगर कालौनी, टीकमगढ़

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