इस अंक में :

डॉ. रवीन्‍द्र अग्निहोत्री का आलेख '' हिन्‍दी एक उपेक्षित क्षेत्र '' प्रेमचंद का आलेख '' साम्‍प्रदायिकता एवं संस्‍कृति '' भीष्‍म साहनी की कहानी '' झूमर '' सत्‍यनारायण पटेल की कहानी '' पनही '' अर्जुन प्रसाद की कहानी '' तलाक '' जयंत साहू की छत्‍तीसगढ़ी कहानी '' परसार '' गिरीश पंकज का व्‍यंग्‍य '' भ्रष्‍ट्राचार के खिलाफ अपुन '' कुबेर का व्‍यंग्‍य '' नो अपील, नो वकील, घोषणापत्र '' गीत गजल कविता

बुधवार, 4 सितंबर 2013

'' राना लिधौरी '' के हाइकु

  '' राना लिधौरी '' के हाइकु
  1
पर्यावरण
की उथल - पुथल।
महा विनाश।।

                    2
                जल के स्रोत
                जंगल औ बादल।
                जीवन ज्योति।।

     3.
साफ जंगल
नदिया प्रदूषित
कैसे मंगल।।

                     4
                जीवन दवा,
                जल, जमीन, हवा।
                बिकने लगी।।

   5
टेढ़ा नजर
जब प्रकृति की होती।
सब रोते हैं।।
राजीव नामदेव राना लिधौरी
संपादक आकांक्षा पत्रिका
शिवनगर कालौनी, टीकमगढ़

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