इस अंक में :

इस अंक में पढ़े : ( आलेख )तनवीर का रंग संसार :महावीर अग्रवाल,( आलेख )सुन्दरलाल द्विजराज नाम हवै : प्रो. अश्विनी केशरवानी, ( आलेख )छत्‍तीसगढ़ी हाना – भांजरा : सूक्ष्‍म भेद- संजीव तिवारी,( आलेख )लील न जाए निशाचरी अवसान : डॉ्. दीपक आचार्य,( कहानी )दिल्‍ली में छत्‍तीसगढ़ : कैलाश बनवासी ,( कहानी )खुले पंजोंवाली चील : बलराम अग्रवाल,( कहानी ) खिड़की : चन्‍द्रमोहन प्रधान,( कहानी ) गोरखधंधा :हरीश कुमार अमित,( व्‍यंग्‍य )फलना जगह के डी.एम: कुंदन कुमार ( व्‍यंग्‍य )हर शाख पे उल्लू बैठा है, अन्जामे - गुलिश्ता क्या होगा ?: रवीन्‍द्र प्रभात, (छत्‍तीसगढ़ी कहानी) गुरुददा : ललितदास मानिकपुरी, लघुकथाएं, कविताएं..... ''

बुधवार, 4 सितंबर 2013

अभिमन्‍यु

·कृष्‍णा श्रीवास्‍तव ' गुरुजी '
तुम्हारे होेने का / अहसास
मुझे होने लगा है
शाय द / मेरे अंदर फौलाद
आकार लेने लगा है ।
तुम्हारे / ठोस इरादों की
तासीर / अब तक व्याÄ है
मेरे जेहन में
नसों में बहता लहू / और लाल हो रहा है
मेरे अन्दर / मेरा लाल
तैयार हो रहा है ।
तुम्हारी ऊजार् से
वरदानी / अभिमन्यु
भेदेगा च क्रव्यूह
उससे सीख लिया है
कथित रथियों के
कुटिलता का रहस्य
अभिमन्यु तैयार हो रहा है
अभिमन्यु ...........।
संकल्प, दिक्ग्वजय  कालेज मागर्,
 राजनांदगांव (छग)

कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें