इस अंक में :

डॉ. रवीन्‍द्र अग्निहोत्री का आलेख '' हिन्‍दी एक उपेक्षित क्षेत्र '' प्रेमचंद का आलेख '' साम्‍प्रदायिकता एवं संस्‍कृति '' भीष्‍म साहनी की कहानी '' झूमर '' सत्‍यनारायण पटेल की कहानी '' पनही '' अर्जुन प्रसाद की कहानी '' तलाक '' जयंत साहू की छत्‍तीसगढ़ी कहानी '' परसार '' गिरीश पंकज का व्‍यंग्‍य '' भ्रष्‍ट्राचार के खिलाफ अपुन '' कुबेर का व्‍यंग्‍य '' नो अपील, नो वकील, घोषणापत्र '' गीत गजल कविता

बुधवार, 4 सितंबर 2013

अभिमन्‍यु

·कृष्‍णा श्रीवास्‍तव ' गुरुजी '
तुम्हारे होेने का / अहसास
मुझे होने लगा है
शाय द / मेरे अंदर फौलाद
आकार लेने लगा है ।
तुम्हारे / ठोस इरादों की
तासीर / अब तक व्याÄ है
मेरे जेहन में
नसों में बहता लहू / और लाल हो रहा है
मेरे अन्दर / मेरा लाल
तैयार हो रहा है ।
तुम्हारी ऊजार् से
वरदानी / अभिमन्यु
भेदेगा च क्रव्यूह
उससे सीख लिया है
कथित रथियों के
कुटिलता का रहस्य
अभिमन्यु तैयार हो रहा है
अभिमन्यु ...........।
संकल्प, दिक्ग्वजय  कालेज मागर्,
 राजनांदगांव (छग)

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