इस अंक में :

डॉ. रवीन्‍द्र अग्निहोत्री का आलेख '' हिन्‍दी एक उपेक्षित क्षेत्र '' प्रेमचंद का आलेख '' साम्‍प्रदायिकता एवं संस्‍कृति '' भीष्‍म साहनी की कहानी '' झूमर '' सत्‍यनारायण पटेल की कहानी '' पनही '' अर्जुन प्रसाद की कहानी '' तलाक '' जयंत साहू की छत्‍तीसगढ़ी कहानी '' परसार '' गिरीश पंकज का व्‍यंग्‍य '' भ्रष्‍ट्राचार के खिलाफ अपुन '' कुबेर का व्‍यंग्‍य '' नो अपील, नो वकील, घोषणापत्र '' गीत गजल कविता

शुक्रवार, 6 सितंबर 2013

अम्मा ऐसी बहू लाना


- आलोक तिवारी  -
अम्मा ऐसी बहू लाना
जो न आये पालकी में बैठकर
ना कहारों केे कंधे में चढ़कर
चल के आये अपने पैरों से।
    अम्मा ऐसी बहू लाना
जो कभी न कराये भू्रण लिंग परीक्षण
समझे लिंग अनुपात का महत्तव
ताकि बेटियाँ मुस्करा सके।
    अम्मा ऐसी बहू लाना
जो पानी का न करे फिजूल खर्च
करे जल की बचत ताकि बच सके
नदिया - तालाब और हम।
    अम्मा ऐसी बहू लाना
जो समझे ऊर्जा संरक्षण का मतलब
बुझा के रखे अनावश्यक बत्तियाँ
ताकि रोशन हो सके कई और घर
    अम्मा ऐसी बहू लाना
जो जाने वृक्षों का महत्व
पूजे वट वृक्ष पीपल को, अपने हाथों से
लगाये पौधे ताकि हो सके
धरती का श्रृंगार और मुझे दहेज में मिले
स्वस्थ जीवन की सौगात।
    अम्मा ऐसी बहू लाना
जो बैठी ना रहे रंगों के इंतजार मेें
आटे से भी बना सके रंगोली
भर सके अपने प्यार का रंग।
    अम्मा ऐसी बहू लाना
जो नये बर्तन खरीदे तो
लिखवाये तेरा नाम
ताकि घर रह सके एक
    अम्मा ऐसी बहू लाना
जो बच्चे के दाखिले के समय
बाप के साथ चढ़वाये अपना भी नाम
ताकि वल्दियत को सही पहचान मिले
    अम्मा ऐसी बहू लाना
जो हो दूरदृष्टा
पर हर चीज को देखती हो निकट से
रत्ना निवास, पाठक वार्ड, कटनी म. प्र.

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