इस अंक में :

डॉ. रवीन्‍द्र अग्निहोत्री का आलेख '' हिन्‍दी एक उपेक्षित क्षेत्र '' प्रेमचंद का आलेख '' साम्‍प्रदायिकता एवं संस्‍कृति '' भीष्‍म साहनी की कहानी '' झूमर '' सत्‍यनारायण पटेल की कहानी '' पनही '' अर्जुन प्रसाद की कहानी '' तलाक '' जयंत साहू की छत्‍तीसगढ़ी कहानी '' परसार '' गिरीश पंकज का व्‍यंग्‍य '' भ्रष्‍ट्राचार के खिलाफ अपुन '' कुबेर का व्‍यंग्‍य '' नो अपील, नो वकील, घोषणापत्र '' गीत गजल कविता

बुधवार, 4 सितंबर 2013

पानी म जादू

नंदकुमार साहू
कोन जनी वो पानी म का जादू हे।
आज सबो मनखे मन ओकरेच काबू हे॥
    मनखे वोला नइ पीयत हे,
    वो मनखे ल पीयत हे।
भरे जवानी कुकुर गत होके,
डोकरा बरोबर जीयत हे॥
    पंडा पुजेरी घलो बिगड़गे,
    दिखत भर के साधू हे,
कोन जनी वो पानी म का जादू हे।
आज सबो मनखे मन ओकरेच काबू हे॥
    चाहे होवय छटï्ठी बरही,
    चाहे होवय बिहाव।
चाहे होवय होरी देवारी,
चाहे कोनो चुनाव॥
    तिहार बार काम कारज म,
    एकरे बेवसथा आगू हे।
कोन जनी वो पानी म का जादू हे।
आज सबो मनखे मन ओकरेच काबू हे॥
    जंगलिहा मन बर छूट हे,
    एकरे आड़ म लूट हे।
का गाँव कँहव, का कँहव सहर,
भटï्ठी वोकर पाँव पूट हे॥
    एक बिरोधी कतको खुरचे,
    सरकार डहर ले लागू हे,
कोन जनी वो पानी म का जादू हे।
आज सबो मनखे मन ओकरेच काबृ हे॥
    अइसन का मीठ घोरााय हे,
    जेमा उही म सबो मोहाय हे।
लइका सियान बुढ़वा जवान
पी के सब झन भकवाय हे॥
    जान सून के जहर पियत हे,
    आँखी सबके पाछू हे
कोन जनी वो पानी म का जादू हे।
आज सबो मनखे मन ओकरेच काबू हे॥
ग्राम धामनसरा  मोखला
पोष्टï - सुरगी, जिला राजनांदगांव 6 छग. 8

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