इस अंक में :

मनोज मोक्षेन्‍द्र का आलेख '' सार्थक व्यंग्य के आवश्यक है व्यंग्यात्मक कटाक्षों की सर्वत्रता '', डॉ. माणिक विश्‍वकर्मा '' नवरंग '' का शोध लेख '' हिन्दी गज़ल का इतिहास एवं छंद विधान: हिन्दी की'',रविन्‍द्र नाथ टैगोर की कहानी '' सीमांत '', मनोहर श्‍याम जोशी की कहानी '' उसका बिस्‍तर '', कहानी ( अनुवाद उडि़या से हिन्दी)'' अनसुलझी''मूल लेखिका:सरोजनी साहू अनुवाद:दिनेश कुमार शास्त्री, छत्तीसगढ़ी कहिनी'' फोंक - फोंक ल काटे म नई बने बात'' लेखक:ललित साहू' जख्मी', बाल कहानी '' अनोखी तरकीब''''मेंढक और गिलहरी'' रचनाकार पराग ज्ञान देव चौधरी,सुशील यादव का व्यंग्य '' मन रे तू काहे न धीर धरे'', त्रिभुवन पांडेय का व्‍यंग्‍य ''ललित निबंध होली पर'',गीत- गजल- कविता: रचनाकार :खुर्शीद अनवर' खुर्शीद',श्याम'अंकुर',महेश कटारे'सुगम',जितेन्द्र'सुकुमार',विवेक चतुर्वेदी,सुशील यादव, संत कवि पवन दीवान,रोज़लीन,डॉ. जीवन यदु, टीकेश्वर सिन्हा'गब्दीवाला, बृजभूषण चतुर्वेदी 'बृजेश', पुस्तक समीक्षा:'' इतिहास बोध से वर्तमान विसंगतियों पर प्रहार'' समीक्षा : एम. एम. चन्द्रा'', ''मौन मंथन: एक समीक्षा''समीक्षा''मंगत रवीन्द्र,''जल की धारा बहती रहे''समीक्षा : डॉ. अखिलेश कुमार'शंखधर'

गुरुवार, 28 नवंबर 2013

वफ़ा प्‍यार से दूर

मनोज आजिज

वफ़ा प्यार से दूर ये शहर है
जवाँ पे कुछ, दिल पे कहर है

यूँ तो फरेबी की सफ़ेद धंधा है
फरिस्ते बनने की ढोंग शाम ओ सहर है

नि·लो सुब्ह जोश ओ उम्मीद लिए
हुयी रात लगती बेकार हर कसर है

गुजरो गर  जिन्दगी की तंग गलियों से
पाओगे फिर भी कुछ टेढ़ी नजऱ है

कत्ल ही तो होती है अरमानों की  यहाँ
मुर्झाया हुआ बेगुल सपनों का शजर है

हर शू अरबाबे दिल की कमी ' आजिज़'
जिओ खुद नहीं कोई शम्मे रहगुजर है
पता
इच्छापुर , ग्वालापारा
पोस्ट. आर. र्आई.  टी . जमशेदपुर. 14
( झारखण्ड )
फोन.0997368014

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