इस अंक में :

डॉ. रवीन्‍द्र अग्निहोत्री का आलेख '' हिन्‍दी एक उपेक्षित क्षेत्र '' प्रेमचंद का आलेख '' साम्‍प्रदायिकता एवं संस्‍कृति '' भीष्‍म साहनी की कहानी '' झूमर '' सत्‍यनारायण पटेल की कहानी '' पनही '' अर्जुन प्रसाद की कहानी '' तलाक '' जयंत साहू की छत्‍तीसगढ़ी कहानी '' परसार '' गिरीश पंकज का व्‍यंग्‍य '' भ्रष्‍ट्राचार के खिलाफ अपुन '' कुबेर का व्‍यंग्‍य '' नो अपील, नो वकील, घोषणापत्र '' गीत गजल कविता

गुरुवार, 28 नवंबर 2013

जिन्दगी एक कशिश

- डॉ. मणी मनेश्वर साहू '  ध्येय '  -
जिन्दगी एक कशिश है
है जीने की, एक तमन्ना
उद्धेलित भावनाएं
सिमटी - सी बैठी
दिल के एक कोने में
फिर अरमानों के उजालों में
रौशनी भरी
अचानक जगमगा उठी है - जिन्दगी
खुला आकाश
बहुत कुछ पाने की एक चाह लिये
परन्तु ... फिर ये क्या ?
सहमी - सी
फीकी पड़ी, मुरझा गई।
जरा सोच,
बैर को भगाना, बैर से बचना, बचाना
हाँ, यही तो है
सावधानी हमारी आपकी
जिन्दगी की।

पता 
पिताम्बर कुंज, गीतांजली चौक
नवागाँव खिसोरा, पो. - धौराभाठा
व्हाया - पाण्डुका, जिला - धमतरी ( छ.ग.)

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