इस अंक में :

इस अंक में पढ़े : ( आलेख )तनवीर का रंग संसार :महावीर अग्रवाल,( आलेख )सुन्दरलाल द्विजराज नाम हवै : प्रो. अश्विनी केशरवानी, ( आलेख )छत्‍तीसगढ़ी हाना – भांजरा : सूक्ष्‍म भेद- संजीव तिवारी,( आलेख )लील न जाए निशाचरी अवसान : डॉ्. दीपक आचार्य,( कहानी )दिल्‍ली में छत्‍तीसगढ़ : कैलाश बनवासी ,( कहानी )खुले पंजोंवाली चील : बलराम अग्रवाल,( कहानी ) खिड़की : चन्‍द्रमोहन प्रधान,( कहानी ) गोरखधंधा :हरीश कुमार अमित,( व्‍यंग्‍य )फलना जगह के डी.एम: कुंदन कुमार ( व्‍यंग्‍य )हर शाख पे उल्लू बैठा है, अन्जामे - गुलिश्ता क्या होगा ?: रवीन्‍द्र प्रभात, (छत्‍तीसगढ़ी कहानी) गुरुददा : ललितदास मानिकपुरी, लघुकथाएं, कविताएं..... ''

बुधवार, 26 फ़रवरी 2014

गज़ल : महेन्‍द्र राठौर

बाजार में रुसवा को भी रुसवा न किया जाय
मर्यादा की अपनी कहीं सौदा न किया जाय
अब मिलने मिलाने का इरादा न किया जाय
आँखों से भी पीने की तमन्ना न किया जाय
जब आसमां पे झूट ने फैला दिया है जाल
इस हाल में ईमान का सौदा न किया जाय
नासमझों में बैठो तो क़दर जाती रहेगी
मेय्यार को अपने यूँ ही सस्ता न किया जाय
रस्ते में सियासत का जताना फज़ूल है
संसद में जा के हाथ को ऊँचा न किया जाय
पैग़ाम रक़ीबों  से है भेजा तबीब को
बीमार हमारा है तो अच्छा न किया जाय
फिर से मिला के हाथ मोहब्बत नहीं रहती
फिर आने जाने वास्ते रस्ता न किया जाय
अपनों ने मिटाया है तो मैं सोच रहा हूं
अपनों से दोबारा कभी रिश्ता न किया जाय
पता -  न्यू चंदनिया पारा
जांजगीर - 495668
मो. 09425541702

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