इस अंक में :

मनोज मोक्षेन्‍द्र का आलेख '' सार्थक व्यंग्य के आवश्यक है व्यंग्यात्मक कटाक्षों की सर्वत्रता '', डॉ. माणिक विश्‍वकर्मा '' नवरंग '' का शोध लेख '' हिन्दी गज़ल का इतिहास एवं छंद विधान: हिन्दी की'',रविन्‍द्र नाथ टैगोर की कहानी '' सीमांत '', मनोहर श्‍याम जोशी की कहानी '' उसका बिस्‍तर '', कहानी ( अनुवाद उडि़या से हिन्दी)'' अनसुलझी''मूल लेखिका:सरोजनी साहू अनुवाद:दिनेश कुमार शास्त्री, छत्तीसगढ़ी कहिनी'' फोंक - फोंक ल काटे म नई बने बात'' लेखक:ललित साहू' जख्मी', बाल कहानी '' अनोखी तरकीब''''मेंढक और गिलहरी'' रचनाकार पराग ज्ञान देव चौधरी,सुशील यादव का व्यंग्य '' मन रे तू काहे न धीर धरे'', त्रिभुवन पांडेय का व्‍यंग्‍य ''ललित निबंध होली पर'',गीत- गजल- कविता: रचनाकार :खुर्शीद अनवर' खुर्शीद',श्याम'अंकुर',महेश कटारे'सुगम',जितेन्द्र'सुकुमार',विवेक चतुर्वेदी,सुशील यादव, संत कवि पवन दीवान,रोज़लीन,डॉ. जीवन यदु, टीकेश्वर सिन्हा'गब्दीवाला, बृजभूषण चतुर्वेदी 'बृजेश', पुस्तक समीक्षा:'' इतिहास बोध से वर्तमान विसंगतियों पर प्रहार'' समीक्षा : एम. एम. चन्द्रा'', ''मौन मंथन: एक समीक्षा''समीक्षा''मंगत रवीन्द्र,''जल की धारा बहती रहे''समीक्षा : डॉ. अखिलेश कुमार'शंखधर'

बुधवार, 26 फ़रवरी 2014

फिर हिटलर


प्रोफेसर थानसिंह वर्मा

फिर हिटलर के कदमों की आहट है
हिटलर तब आया था
लोकतंत्र की हत्या के लिए
जर्मन संसद पर हमला 
दोष विरोधियों के सर
दे विकास का वास्ता 
किया सत्ता पर अधिकार
किया यहूदियों का संहार 
फिर धावा कमेरों पर
मार्क्‍स , लेनिन, समाजवाद पर
गल्फस्ट्रीम की गर्मधाराएं भले नहीं मुड़ी
हिटलर के लिए / चुप रह साथ दिए
टैंक - मोर्टर लंदन - वाशिंगटन के
कमेरों की हड्डियां बने बज्र
हिटलर के लिए बना वाटरलू लेनिनग्राद.
अब फिर हिटलर के
कदमों की आहट है
दसों दिशाओं, दसमुख से वृन्दगान
ओ हिटलर ! विकास  पुरुष
एजेण्डा दिल्ली
खाद - पानी, अयोध्या,काशी, मथुरा
रसद् वाशिंगटन का
निशाने पर फिर लोकतंत्र
गांधी, अम्बेडकर, संविधान, समाजवाद
यहुदियों की जगह मुसलमान
इसाई, दलित, आदिवासी, कमेरे ( मजदूर )
देखना है बर्लिन से दिल्ली का
फासला कैसे तय करता है हिटलर,
क्या कमेरों की हड्डियां फिर बनेंगे बज्र
और दिल्ली वाटरलू ?

पता 
शांतिनगर, गली नं. 2
राजनांदगांव [छत्तीसगढ़]
मोबाईल : 9406272857  

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