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इस अंक में पढ़े : ( आलेख )तनवीर का रंग संसार :महावीर अग्रवाल,( आलेख )सुन्दरलाल द्विजराज नाम हवै : प्रो. अश्विनी केशरवानी, ( आलेख )छत्‍तीसगढ़ी हाना – भांजरा : सूक्ष्‍म भेद- संजीव तिवारी,( आलेख )लील न जाए निशाचरी अवसान : डॉ्. दीपक आचार्य,( कहानी )दिल्‍ली में छत्‍तीसगढ़ : कैलाश बनवासी ,( कहानी )खुले पंजोंवाली चील : बलराम अग्रवाल,( कहानी ) खिड़की : चन्‍द्रमोहन प्रधान,( कहानी ) गोरखधंधा :हरीश कुमार अमित,( व्‍यंग्‍य )फलना जगह के डी.एम: कुंदन कुमार ( व्‍यंग्‍य )हर शाख पे उल्लू बैठा है, अन्जामे - गुलिश्ता क्या होगा ?: रवीन्‍द्र प्रभात, (छत्‍तीसगढ़ी कहानी) गुरुददा : ललितदास मानिकपुरी, लघुकथाएं, कविताएं..... ''

बुधवार, 26 फ़रवरी 2014

फिर हिटलर


प्रोफेसर थानसिंह वर्मा

फिर हिटलर के कदमों की आहट है
हिटलर तब आया था
लोकतंत्र की हत्या के लिए
जर्मन संसद पर हमला 
दोष विरोधियों के सर
दे विकास का वास्ता 
किया सत्ता पर अधिकार
किया यहूदियों का संहार 
फिर धावा कमेरों पर
मार्क्‍स , लेनिन, समाजवाद पर
गल्फस्ट्रीम की गर्मधाराएं भले नहीं मुड़ी
हिटलर के लिए / चुप रह साथ दिए
टैंक - मोर्टर लंदन - वाशिंगटन के
कमेरों की हड्डियां बने बज्र
हिटलर के लिए बना वाटरलू लेनिनग्राद.
अब फिर हिटलर के
कदमों की आहट है
दसों दिशाओं, दसमुख से वृन्दगान
ओ हिटलर ! विकास  पुरुष
एजेण्डा दिल्ली
खाद - पानी, अयोध्या,काशी, मथुरा
रसद् वाशिंगटन का
निशाने पर फिर लोकतंत्र
गांधी, अम्बेडकर, संविधान, समाजवाद
यहुदियों की जगह मुसलमान
इसाई, दलित, आदिवासी, कमेरे ( मजदूर )
देखना है बर्लिन से दिल्ली का
फासला कैसे तय करता है हिटलर,
क्या कमेरों की हड्डियां फिर बनेंगे बज्र
और दिल्ली वाटरलू ?

पता 
शांतिनगर, गली नं. 2
राजनांदगांव [छत्तीसगढ़]
मोबाईल : 9406272857  

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