इस अंक में :

इस अंक में पढ़े : ( आलेख )तनवीर का रंग संसार :महावीर अग्रवाल,( आलेख )सुन्दरलाल द्विजराज नाम हवै : प्रो. अश्विनी केशरवानी, ( आलेख )छत्‍तीसगढ़ी हाना – भांजरा : सूक्ष्‍म भेद- संजीव तिवारी,( आलेख )लील न जाए निशाचरी अवसान : डॉ्. दीपक आचार्य,( कहानी )दिल्‍ली में छत्‍तीसगढ़ : कैलाश बनवासी ,( कहानी )खुले पंजोंवाली चील : बलराम अग्रवाल,( कहानी ) खिड़की : चन्‍द्रमोहन प्रधान,( कहानी ) गोरखधंधा :हरीश कुमार अमित,( व्‍यंग्‍य )फलना जगह के डी.एम: कुंदन कुमार ( व्‍यंग्‍य )हर शाख पे उल्लू बैठा है, अन्जामे - गुलिश्ता क्या होगा ?: रवीन्‍द्र प्रभात, (छत्‍तीसगढ़ी कहानी) गुरुददा : ललितदास मानिकपुरी, लघुकथाएं, कविताएं..... ''

गुरुवार, 22 मई 2014

मई 2014 से जुलाई 2014

पाठकों की कलम से
प्रतिभा
बसंत की कुचियों में ग्रामीण जनजीवन मूर्तरुप लेता है : सुशील भोले
सम्‍पादकीय
छत्‍तीसगढ़ी के साहित्‍यकार: अपना दायित्‍व समझें
आलेख
लोक की समूहवादी चेतना और राऊत नाच : डां.गोरेलाल चंदेल
कहानी
खोल दो : सआदत हसन मन्‍टो
रोपवे : मनोज कुमार शुक्‍ल ' मनोज '
व्‍यंग्‍य
सुरा प्रेमियों का सम्‍मेलन : प्रभुदयाल श्रीवास्‍तव
आलोचना का सुख : ब्रजकिशोर झा
चरित्र का जामुन : मिलिन्‍द साव
गीत / गजल / कविता
छत्‍तीसगढ़ी गीत : सबो सुख हे गांव म : गणेश यदु
दोहे : उसके हाथों में नहीं : ब्रजभूषण चतुर्वेदी ' ब्रजेश '
गीत : जीवन नगरी पर सदियों से : कृपाशंकर शर्मा ' अचूक '
दो दोहे : जगन्‍नाथ ' विश्‍व '
गीत : चांदी की छड़ी : डां. गार्गीशरण मिश्र ' मराल '
कविता : जल उठी ज्‍योति : जय जयराम आनन्‍द
कविता : मैं समझूंगी वरमाला है :  सरिता बाजपेयी ' साक्षी '
गजल : केशव शरण
लघु व्‍यंग्‍य कथा
भाषणबाज : नूतन प्रसाद
कुबेर की ल्‍ाघु व्‍यंग्‍य कथाएं
लघुकथा
अपराधी आंकड़े : अंकुश्री
सुरता
अव्दितीय क्रांतिकारी कवि : कुंजबिहारी चौबे : आचार्य सरोज व्दिवेदी
पुस्‍तक समीक्षा
उपदेशात्‍मक काव्‍य संग्रह : पीरा : समीक्षक - यशवंत मेश्राम
साहित्यिक सांस्‍कृतिक गतिविधियां
गंडई पंडरिया में साकेत साहित्‍य परिषद सुरगी का पंद्रहवां सम्‍मान समारोह एवं वैचारिक गोष्‍ठी सम्‍पन्‍न
चक्रधर की साहित्‍यधारा का विमोचन
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किसानों की समृध्दि की पहचान

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