इस अंक में :

डॉ. रवीन्‍द्र अग्निहोत्री का आलेख '' हिन्‍दी एक उपेक्षित क्षेत्र '' प्रेमचंद का आलेख '' साम्‍प्रदायिकता एवं संस्‍कृति '' भीष्‍म साहनी की कहानी '' झूमर '' सत्‍यनारायण पटेल की कहानी '' पनही '' अर्जुन प्रसाद की कहानी '' तलाक '' जयंत साहू की छत्‍तीसगढ़ी कहानी '' परसार '' गिरीश पंकज का व्‍यंग्‍य '' भ्रष्‍ट्राचार के खिलाफ अपुन '' कुबेर का व्‍यंग्‍य '' नो अपील, नो वकील, घोषणापत्र '' गीत गजल कविता

गुरुवार, 22 मई 2014

अपराधी आंकड़े

अंकुश्री

राज्य की जनता डकैती, लूट-मार, राहजनी, हत्या आदि के कारण तबाह थी. प्रशासन में फैले भ्रष्टाचार के कारण राज्य में अराजकता की स्थिति पैदा हो गयी थी.
तबाह हो रही जनता के लिये सरकार अपनी चिन्ता प्रदर्शित करने लगी. जनता के संतोष के लिये पुलिस और प्रशासन की गतिशीलता को खूब बढ़ा-चढ़ा कर प्रचारित किया जाने लगा. राज्य का रेडियो और जन सम्पर्क विभाग अपनी कार्यशीलता का ढि़ंढ़ोरा पीट रहा था. किसी दिन राज्य भर में पांच सौ अपराधी पकड़े जाने की सूचना प्रचाारित होती थी तो किसी दिन आठ सौ की.
अपराधियों की गिरफ्तारी का आंकड़ा रोज-रोज बढ़ता ही जा रहा था. कुछ ही दिनों में राज्य में गिरफ्तार कुल अपराधियों का आंकड़ा राज्य की कुल जनसंख्या से भी ऊपर पहुंच गया. लेकिन राज्य की जनता का भय कम नहीं हुआ. जनता का भय भी सरकारी आंकड़ों की तरह बढ़ता जा रहा था. क्योंकि जनता, जो पहले रात में भय खा रही थी, अब दिन में  लूटी जाने लगी थी.
पता -
सिदरौल, प्रेस कॉलोनी, पोस्ट बॉक्स 28, नामकुम, रांची-834 010

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