इस अंक में :

इस अंक में पढ़े : शेषनाथ प्रसाद का आलेख :मुक्तिबोध और उनकी कविताओं का काव्‍यतत्‍व, डॉ. गिरीश काशिद का शोध लेख '' दलित चेतना के कथाकार : विपिन बिहारी, डॉ. गोविंद गुंडप्‍पा शिवशिटृे का शोध लेख '' स्‍त्री होने की व्‍यथा ' गुडि़या - भीतर - गुडि़या ', शोधार्थी आशाराम साहू का शोध लेख '' भारतीय रंगमंच में प्रसाद के नाटकों का योगदान '' हरिभटनागर की कहानी '' बदबू '', गजानन माधव मुक्तिबोध की कहानी '' क्‍लॅड ईथरली '' अंजना वर्मा की कहानी '' यहां - वहां, हर कहीं '' शंकर पुणतांबेकर की कहानी '' चित्र '' धर्मेन्‍द्र निर्मल की छत्‍तीसगढ़ी कहानी '' मंतर '' अटल बिहारी बाजपेयी की गीत '' कवि, आज सुनाओ वह गान रे '' हरिवंश राय बच्‍चन की रचना ,ईश्‍वर कुमार की छत्‍तीसगढ़ी गीत '' मोला सुनता अउ सुमत ले '' मिलना मलरिहा के छत्‍तीसगढ़ी गीत '' छत्‍तीसगढ़ी लदका गे रे '' रोजलीन की कविता '' वह सुबह कब होगी '' संतोष श्रीवास्‍तव ' सम ' की कविता '' दो चिडि़यां ''

गुरुवार, 22 मई 2014

दो दोहे

जगन्‍नाथ '' विश्‍व ''
बच्‍चे पुष्‍प समान 
बच्चे पुष्प समान है खुशबू के भंडार
खुशबू को गुरु लोग ही देते है विस्तार

गिरधर से भी है बड़ा गुरुवर का स्थान
इसीलिए है वंदनीय सारस्वत सम्मान

वेतन मिलता है तभी टीचर को सौ टंच
आवेदन पर ठोक दें ठप्पा गर सरपंच

वर्ष भर सहता रहता अध्यापक अपमान
शिक्षक दिवस इक मात्र ही मिल पाता सम्मान

लक्ष्मी देवी जम गई उल्लूओं के द्वार
डिग्री लेकर पढ़ा लिखा घूम रहा बेकार

चाता तो अनुकूल था गया धूल में मूल
उम्र सारी बीत गई बोये बीज बबूल

शनि कर्क संग हो गया ले आँधी तूफान
जब- जब भी ऐसा हुआ होता लहुलुहान

बंदर दाँत दिखा रहा पाकर लम्बी पूँछ
अकड़ रहा है आदमी और मरोड़े मूँछ
पर्यावरण आधार
धरती दुल्हन सी लगे पर्यावरण आधार
जन जीवन फूले फले हरियाली  ही सार

प्रदूषण मुक्ति के लिए चलो हमारे साथ
पौधे रोपे रोज ही सभी हजारों हाथ

अच्छा है हम जी रहे अपने अपने गाँव
यदि शहर में होते तो आते उल्टे पाँव

रोपा अब अनुकूल था पर पाया प्रतिकूल
गैरों को क्या दोष दें बोये बीज बबूल

गौ माता के देश में है गोबर का काल
बाँध सको तो बाँध लो पानी पहले पाल

सड़क ढूंढते - ढूंढते  बिगड़ गई रे चाल
बिजली भी बीमार है हाल हुआ बेहाल

भूले चंदन की महक भूले रंग गुलाल
इक दूजे पर बेशरम कीचड़ रहे उछाल
'' मनोबल '' ,25 एम.आई.जी.
हनुमान नगर, नागदा जं. म.प्र. 456335
ई मेल : jagannthvishwa@ gmail.com 

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