इस अंक में :

मनोज मोक्षेन्‍द्र का आलेख '' सार्थक व्यंग्य के आवश्यक है व्यंग्यात्मक कटाक्षों की सर्वत्रता '', डॉ. माणिक विश्‍वकर्मा '' नवरंग '' का शोध लेख '' हिन्दी गज़ल का इतिहास एवं छंद विधान: हिन्दी की'',रविन्‍द्र नाथ टैगोर की कहानी '' सीमांत '', मनोहर श्‍याम जोशी की कहानी '' उसका बिस्‍तर '', कहानी ( अनुवाद उडि़या से हिन्दी)'' अनसुलझी''मूल लेखिका:सरोजनी साहू अनुवाद:दिनेश कुमार शास्त्री, छत्तीसगढ़ी कहिनी'' फोंक - फोंक ल काटे म नई बने बात'' लेखक:ललित साहू' जख्मी', बाल कहानी '' अनोखी तरकीब''''मेंढक और गिलहरी'' रचनाकार पराग ज्ञान देव चौधरी,सुशील यादव का व्यंग्य '' मन रे तू काहे न धीर धरे'', त्रिभुवन पांडेय का व्‍यंग्‍य ''ललित निबंध होली पर'',गीत- गजल- कविता: रचनाकार :खुर्शीद अनवर' खुर्शीद',श्याम'अंकुर',महेश कटारे'सुगम',जितेन्द्र'सुकुमार',विवेक चतुर्वेदी,सुशील यादव, संत कवि पवन दीवान,रोज़लीन,डॉ. जीवन यदु, टीकेश्वर सिन्हा'गब्दीवाला, बृजभूषण चतुर्वेदी 'बृजेश', पुस्तक समीक्षा:'' इतिहास बोध से वर्तमान विसंगतियों पर प्रहार'' समीक्षा : एम. एम. चन्द्रा'', ''मौन मंथन: एक समीक्षा''समीक्षा''मंगत रवीन्द्र,''जल की धारा बहती रहे''समीक्षा : डॉ. अखिलेश कुमार'शंखधर'

गुरुवार, 22 मई 2014

चक्रधर की साहित्‍यधारा का विमोचन

इलाहाबाद। प्रसिद्ध कहानीकार मार्कण्डेय की जन्मतिथि पर 2 मई को इलाहाबाद में म्यूजिम हॉल में दोपहर 2.30 बजे से आयोजित कार्यक्रम में लोकभारती से प्रकाशित मार्कण्डेय की कहानियों का संग्रह हलयोग तथा कल्पना पत्रिका में चक्रधर के नाम से साहित्यधारा स्तम्भ में लिखी टिप्पणियों के संकलन चक्रधर की साहित्यधारा का विमोचन प्रख्यात कहानीकार शेखर जोशी ने किया।
इस अवसर पर कहानीकार मार्कण्डेय विषय पर आयोजित संगोष्ठी में  राँची से आये आलोचक रविभूषण ने कहा कि उनके सम्पादक स्तम्भकार आलोचक एवं कवि रूप को समझे बिना मुकम्मल बात नहीं हो सकती। मार्कण्डेय की कहानियों की चेतना में किसान हैं। वह किसान को भारत की संस्कृति और परम्परा का मूल केन्द्र मानते हैं। मार्कण्डेय नेहरूबियन आधुनिकता की तरह की आधुनिक कहानियाँ लिखने वाले नहीं थे। वह जमीनी हकीकत के कहानीकार हैं। उनके यहाँ पुराना और नया दोनों ही महत्वपूर्ण है। वह वर्तमान को बदलने वाले कहानीकार हैं। इस क्रम में उन्होंने मार्कण्डेय की कहानी साबुन जूते दूध और दवा कहानी की चर्चा की।
आलोचक राजेन्द्र कुमार ने कहा कि मार्कण्डेय सोद्देश्य कहानियाँ ही लिखते थे। इनकी ग्रामीण कथानकों की कहानियों में नास्टेल्जिया नहीं है बल्कि ठोस यथार्थ है।
कथाकार दूधनाथ सिंह ने कहा कि मार्कण्डेय की कहानियों में व्यक्तित्व और यथार्थ का अन्तर्विरोध है जो उन्हें बड़ा कहानीकार बनाता है।
अध्यक्षता करते हुये शेखर जोशी ने कहा कि मार्कण्डेय की दो पुस्तकें प्रकाशित होना एक महत्वपूर्ण ऐतिहासिक कार्य हुआ है। कहानियों पर उन्होंने कहा कि मार्कण्डेय की कहानियों में एक फादर फिगर है जिसकी समाजिक स्थिति का मूल्याँकन वर्तमान पीढ़ी करती है।
कार्यक्रम की औपचारिक शुरुआत मार्कण्डेय की पत्नी विद्यावती द्वारा दीप प्रज्वलन के साथ हुई। वक्ताओं का स्वागत रमेश ग्रोवर ने किया। कार्यक्रम का संचालन बलभद्र ने किया तथा धन्यवाद लोकभारती के संचालक प्रबन्धक आमोद माहेश्वरी ने किया। इस अवसर पर कामरेड जिला उल हक अली अहमद फातमी प्रणय कृष्ण जीपी मिश्र हिमांशु रंजन संतोष भदोरिया केके पाण्डेय अविनाश मिश्र अरिन्दम तथा मार्कण्डेय के परिजनों में उनके पुत्र सौमित्र पुत्री सस्या दामाद चैतन्य आदि उपस्थित थे।

कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें