इस अंक में :

डॉ. रवीन्‍द्र अग्निहोत्री का आलेख '' हिन्‍दी एक उपेक्षित क्षेत्र '' प्रेमचंद का आलेख '' साम्‍प्रदायिकता एवं संस्‍कृति '' भीष्‍म साहनी की कहानी '' झूमर '' सत्‍यनारायण पटेल की कहानी '' पनही '' अर्जुन प्रसाद की कहानी '' तलाक '' जयंत साहू की छत्‍तीसगढ़ी कहानी '' परसार '' गिरीश पंकज का व्‍यंग्‍य '' भ्रष्‍ट्राचार के खिलाफ अपुन '' कुबेर का व्‍यंग्‍य '' नो अपील, नो वकील, घोषणापत्र '' गीत गजल कविता

गुरुवार, 22 मई 2014

भाषणबाज

नूतन प्रसाद 

नेताजी आजकल स्वर्ग में ही निवासकर रहे थे.यद्यपि उन्हें सब प्रकार की सुविधाएं प्राप्त थीं तो भी अनशन पर बैठ गये.इसकी खबर अधिकारियों को लगी तो वे दौड़े आये.उनने अनशन पर बैठने का कारण पूछा तो नेता जी बोले -हम यहां की व्यवस्था से संतुष्ट नहीं हैं इसलिए व्यवस्था बदली जाय.''
अधिकारियों ने साश्चर्य कहा -आप भी बड़े विचित्र जीव हैं. आपको दूसरों के समान भोजन कपड़े अर्थात आवश्यकता की सारी वस्तुएं मिल रही है.आपसे भेदभाव भी नहीं किया जाता फिर आपकी असंतुष्टि का कारण समझ नहीं आता.''
- यही तो दुख है कि हमारे बराबर दूसरों को भी अधिकार दे दिया गया है जबकि हम विशिष्ट हैं. गरीबा को देखो - वह हमारा नौकर था. जूते साफ करता था.हम मलाई खाते थे तो वह दुत्‍कार  खाता था.लेकिन वही अब हमारे साथ बैठकर भोजन करता है.यही नहीं हमसे टक्कर भी लेता है जबकि ये बातें हमारी शान के खिलाफ है.''
- आपकी शान मिट्टी में मिल जाये पर हम व्यवस्था नहीं बदलेंगें.''
- तो हमें नर्क  भेजने का प्रबंध किया जाये.वहां के जीव जो बहुत दुखी हैं.उनकी सेवा करेंगे.
- झूठ क्यों बोलते हैं.आपने कब किसकी सेवा की.यदि सत्य बतायेंगे तो नर्क  भेजने के लिए विचार भी करेंगे.
नेताजी बहुत देर तक सोचते रहे फिर बोले-हकीकत यह है कि जब मैं यहां की व्यवस्था की आलोचना करता हूं तो दूसरे जीव मेरी बातों पर विश्वास नहीं करते.यदि वहां नर्क चला जाऊंगा तो वहां की व्यवस्था के बारे में उल्टा सीधा आक्षेप करने का अवसर मिलेगा.
अधिकारियों ने पूछा - भाषण देना जरूरी है क्या ? मुंह पर ताला लगाकर रखेंगें तो काम नहीं बनेगा ?
नेता जी तुनके - मैं नेता हूं.भाषण दिये बगैर कैसे रह सकता हूं.
- आप कैसे भी रहें पर न तो व्यवस्था बदली जायेगी न तो आपको नर्क  में भेजा जायेगा.यहीं पर दूसरों के समान रहना पड़ेगा.
इतना कह अधिकारियों ने उनकी बोलती बन्द कर दी और  उन्हें काम पर ले गये.  
भंडारपुर ( करेला ) 
पो. - ढारा, व्‍हाया - डोंगरगढ़ 
जिला - राजनांदगांव ( छ.ग.) 

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