इस अंक में :

इस अंक में पढ़े : ( आलेख )तनवीर का रंग संसार :महावीर अग्रवाल,( आलेख )सुन्दरलाल द्विजराज नाम हवै : प्रो. अश्विनी केशरवानी, ( आलेख )छत्‍तीसगढ़ी हाना – भांजरा : सूक्ष्‍म भेद- संजीव तिवारी,( आलेख )लील न जाए निशाचरी अवसान : डॉ्. दीपक आचार्य,( कहानी )दिल्‍ली में छत्‍तीसगढ़ : कैलाश बनवासी ,( कहानी )खुले पंजोंवाली चील : बलराम अग्रवाल,( कहानी ) खिड़की : चन्‍द्रमोहन प्रधान,( कहानी ) गोरखधंधा :हरीश कुमार अमित,( व्‍यंग्‍य )फलना जगह के डी.एम: कुंदन कुमार ( व्‍यंग्‍य )हर शाख पे उल्लू बैठा है, अन्जामे - गुलिश्ता क्या होगा ?: रवीन्‍द्र प्रभात, (छत्‍तीसगढ़ी कहानी) गुरुददा : ललितदास मानिकपुरी, लघुकथाएं, कविताएं..... ''

गुरुवार, 22 मई 2014

चांदी की छड़ी

गार्गीशरण मिश्र '' मराल ''

संगीनों का रंग हरेगी चाँदी की यह छड़ी हमारी।
चाँदी की यह छड़ी कि जिसकी
खाते मार न लोग अघाते,
चेहरे होते लाल खुशी से
फिर भी फूले नहीं समाते,
लोहे की हथकड़ी पुलिस की, सोने की हथकड़ी हमारी।
चाँदी की चहारदीवारी
अंदर सोने की कोठरियाँ
सुरा सुराही लेकर कर में
पहरे पर रहती सुंदरियाँ
कैद कड़ी है सरकारी तो कैद और भी कड़ी है हमारी।
करामात जादू की देखो
बड़े - बड़े है इससे डरते
खाते रकम राजकोषों से
पर हैं काम हमारा करते
बात बड़ी है राजा की तो बात और भी बड़ी हमारी।
वहाँ ज्योति आशा की झिलमिल
यहाँ प्रभा चाँदी की फैली,
वहाँ भरे कागज के थैले
यहाँ भरी नोटों  की थैली,
चैन कहाँ आये जब तीली आँखों में हो गड़ी हमारी।
- पता -
1436 / सरस्वती कालोनी, चेरीताल वार्ड, जबलपुर म.प्र. - 482002

कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें