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गुरुवार, 22 मई 2014

मैं समझूंगी वरमाला है

सरिता बाजपेयी ' साक्षी '
आज चली इस दुनियां से,
साजन न मिला इस घरती पर
यदि अपनी सी मैं तुम्हें लगू
दो फूल चढाना अर्थी पर
ये मौन हड्डियां अब मेरी
तुमको न बुलानें जायेंगी
कुछ समझ सको तो आ जाना
वर्ना य़ुँ ही जल जायेंगी,
यूँ तो जीवन भर बला किया बस
आज आखिरी ज्वाला है
तुम दो आंसू टपका देना
मैं समझूंगी वरमाला  है..!!!
- पता -
शिवम संगीत अकादमी, 250, वाडूजई, 
शाहजहांपुर - मो. 094252756034

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