इस अंक में :

डॉ. रवीन्‍द्र अग्निहोत्री का आलेख '' हिन्‍दी एक उपेक्षित क्षेत्र '' प्रेमचंद का आलेख '' साम्‍प्रदायिकता एवं संस्‍कृति '' भीष्‍म साहनी की कहानी '' झूमर '' सत्‍यनारायण पटेल की कहानी '' पनही '' अर्जुन प्रसाद की कहानी '' तलाक '' जयंत साहू की छत्‍तीसगढ़ी कहानी '' परसार '' गिरीश पंकज का व्‍यंग्‍य '' भ्रष्‍ट्राचार के खिलाफ अपुन '' कुबेर का व्‍यंग्‍य '' नो अपील, नो वकील, घोषणापत्र '' गीत गजल कविता

शनिवार, 30 अगस्त 2014

बरसों बाद

आनन्‍द तिवारी पौराणिक 
सोंधी माटी गाँव की
फिर आई याद
बरसों बाद

    छू - छूव्वल, गिल्ली डंडे
    गोल - गोल रंगीन कंचे
    अमराई में आम तोड़ना
    कागज की नाव, नदी में छोड़ना
    चिड़ियों सी चहकने की साध
    बरसों बाद

चुम्मा अम्मा का
हुम्मा बछिये का
नानी के हाथों भुने भुट्टे
भइया के दिए पैसे छुट्टे
मंदिर में कीर्तन, शंखनाद
बरसों बाद

    शाला में टंगी पेंडुलम घड़ी
    गुरुजी की वह बड़ी छड़ी
    जलसे, मेले - ठेले, हाट
    खुशियों की नहीं तादाद
    बरसों बाद

दीदी की लाई गठरी
स्वाद भरी मिठाई - मठरी
चिड़ियों का कलरव बंसवारे
सोनकिरन सुबह पांव पखारे
हर दिन था आबाद
बरसों बाद

    वह निश्छल, अबोध बचपन
    कितना पावन, तन - मन
    आँखों में फिर नर्त्तन करता
    अतीत को वर्तमान में करता
    प्रेम, सुलह, नहीं विवाद
    बरसों बाद
पता -
श्रीराम टाकीज मार्ग,
महासमुन्‍द (छ.ग.) 549
3445




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