इस अंक में :

मनोज मोक्षेन्‍द्र का आलेख '' सार्थक व्यंग्य के आवश्यक है व्यंग्यात्मक कटाक्षों की सर्वत्रता '', डॉ. माणिक विश्‍वकर्मा '' नवरंग '' का शोध लेख '' हिन्दी गज़ल का इतिहास एवं छंद विधान: हिन्दी की'',रविन्‍द्र नाथ टैगोर की कहानी '' सीमांत '', मनोहर श्‍याम जोशी की कहानी '' उसका बिस्‍तर '', कहानी ( अनुवाद उडि़या से हिन्दी)'' अनसुलझी''मूल लेखिका:सरोजनी साहू अनुवाद:दिनेश कुमार शास्त्री, छत्तीसगढ़ी कहिनी'' फोंक - फोंक ल काटे म नई बने बात'' लेखक:ललित साहू' जख्मी', बाल कहानी '' अनोखी तरकीब''''मेंढक और गिलहरी'' रचनाकार पराग ज्ञान देव चौधरी,सुशील यादव का व्यंग्य '' मन रे तू काहे न धीर धरे'', त्रिभुवन पांडेय का व्‍यंग्‍य ''ललित निबंध होली पर'',गीत- गजल- कविता: रचनाकार :खुर्शीद अनवर' खुर्शीद',श्याम'अंकुर',महेश कटारे'सुगम',जितेन्द्र'सुकुमार',विवेक चतुर्वेदी,सुशील यादव, संत कवि पवन दीवान,रोज़लीन,डॉ. जीवन यदु, टीकेश्वर सिन्हा'गब्दीवाला, बृजभूषण चतुर्वेदी 'बृजेश', पुस्तक समीक्षा:'' इतिहास बोध से वर्तमान विसंगतियों पर प्रहार'' समीक्षा : एम. एम. चन्द्रा'', ''मौन मंथन: एक समीक्षा''समीक्षा''मंगत रवीन्द्र,''जल की धारा बहती रहे''समीक्षा : डॉ. अखिलेश कुमार'शंखधर'

शनिवार, 30 अगस्त 2014

बरसों बाद

आनन्‍द तिवारी पौराणिक 
सोंधी माटी गाँव की
फिर आई याद
बरसों बाद

    छू - छूव्वल, गिल्ली डंडे
    गोल - गोल रंगीन कंचे
    अमराई में आम तोड़ना
    कागज की नाव, नदी में छोड़ना
    चिड़ियों सी चहकने की साध
    बरसों बाद

चुम्मा अम्मा का
हुम्मा बछिये का
नानी के हाथों भुने भुट्टे
भइया के दिए पैसे छुट्टे
मंदिर में कीर्तन, शंखनाद
बरसों बाद

    शाला में टंगी पेंडुलम घड़ी
    गुरुजी की वह बड़ी छड़ी
    जलसे, मेले - ठेले, हाट
    खुशियों की नहीं तादाद
    बरसों बाद

दीदी की लाई गठरी
स्वाद भरी मिठाई - मठरी
चिड़ियों का कलरव बंसवारे
सोनकिरन सुबह पांव पखारे
हर दिन था आबाद
बरसों बाद

    वह निश्छल, अबोध बचपन
    कितना पावन, तन - मन
    आँखों में फिर नर्त्तन करता
    अतीत को वर्तमान में करता
    प्रेम, सुलह, नहीं विवाद
    बरसों बाद
पता -
श्रीराम टाकीज मार्ग,
महासमुन्‍द (छ.ग.) 549
3445




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