इस अंक में :

इस अंक में पढ़े : ( आलेख )तनवीर का रंग संसार :महावीर अग्रवाल,( आलेख )सुन्दरलाल द्विजराज नाम हवै : प्रो. अश्विनी केशरवानी, ( आलेख )छत्‍तीसगढ़ी हाना – भांजरा : सूक्ष्‍म भेद- संजीव तिवारी,( आलेख )लील न जाए निशाचरी अवसान : डॉ्. दीपक आचार्य,( कहानी )दिल्‍ली में छत्‍तीसगढ़ : कैलाश बनवासी ,( कहानी )खुले पंजोंवाली चील : बलराम अग्रवाल,( कहानी ) खिड़की : चन्‍द्रमोहन प्रधान,( कहानी ) गोरखधंधा :हरीश कुमार अमित,( व्‍यंग्‍य )फलना जगह के डी.एम: कुंदन कुमार ( व्‍यंग्‍य )हर शाख पे उल्लू बैठा है, अन्जामे - गुलिश्ता क्या होगा ?: रवीन्‍द्र प्रभात, (छत्‍तीसगढ़ी कहानी) गुरुददा : ललितदास मानिकपुरी, लघुकथाएं, कविताएं..... ''

गुरुवार, 28 अगस्त 2014

इल्म की शम्‍अ जलाओ

    इब्राहीम कुरैशी
इल्म की शम्‍अ जलाओ तो कोई बात बने।
घरों में रौशनी लाओ तो कोई बात बने।।
कल अंजाम जो भी होगा तो देखा जायेगा,
सोच ये अपनी बनाओ तो कोई बात बने।
हमारे आशियानों में अंधेरे काबिज़ है,
बला को मार भगाओ तो कोई बात बने।
कर के साजिश हाए मक्कार बन गए रहबर,
आईना उनको दिखाओ तो कोई बात बने।
अक्सर मिल जाएँगे गिरतों को गिराने वाले,
दौड़कर उनको उठाओ तो कोई बात बने।
ये जुल्म की रात बड़ी लंबी हुई जाती है,
एक सूरज ऊगाओ तो कोई बात बने।
दिलों के बीच ये नफरत की ल$कीरें क्यों है,
आगे बढ़कर इसे मिटाओ तो कोई बात बने।
सोते रहोगे यूँ ही तो न मिलेगी मंजिल,
जागो और सबको जगाओ तो कोई बात बने।
पता 
स्टेशन रोड, महासमुन्द (छ.ग.)- 493445
मोबाईल - 08982733227

कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें