इस अंक में :

मनोज मोक्षेन्‍द्र का आलेख '' सार्थक व्यंग्य के आवश्यक है व्यंग्यात्मक कटाक्षों की सर्वत्रता '', डॉ. माणिक विश्‍वकर्मा '' नवरंग '' का शोध लेख '' हिन्दी गज़ल का इतिहास एवं छंद विधान: हिन्दी की'',रविन्‍द्र नाथ टैगोर की कहानी '' सीमांत '', मनोहर श्‍याम जोशी की कहानी '' उसका बिस्‍तर '', कहानी ( अनुवाद उडि़या से हिन्दी)'' अनसुलझी''मूल लेखिका:सरोजनी साहू अनुवाद:दिनेश कुमार शास्त्री, छत्तीसगढ़ी कहिनी'' फोंक - फोंक ल काटे म नई बने बात'' लेखक:ललित साहू' जख्मी', बाल कहानी '' अनोखी तरकीब''''मेंढक और गिलहरी'' रचनाकार पराग ज्ञान देव चौधरी,सुशील यादव का व्यंग्य '' मन रे तू काहे न धीर धरे'', त्रिभुवन पांडेय का व्‍यंग्‍य ''ललित निबंध होली पर'',गीत- गजल- कविता: रचनाकार :खुर्शीद अनवर' खुर्शीद',श्याम'अंकुर',महेश कटारे'सुगम',जितेन्द्र'सुकुमार',विवेक चतुर्वेदी,सुशील यादव, संत कवि पवन दीवान,रोज़लीन,डॉ. जीवन यदु, टीकेश्वर सिन्हा'गब्दीवाला, बृजभूषण चतुर्वेदी 'बृजेश', पुस्तक समीक्षा:'' इतिहास बोध से वर्तमान विसंगतियों पर प्रहार'' समीक्षा : एम. एम. चन्द्रा'', ''मौन मंथन: एक समीक्षा''समीक्षा''मंगत रवीन्द्र,''जल की धारा बहती रहे''समीक्षा : डॉ. अखिलेश कुमार'शंखधर'

गुरुवार, 28 अगस्त 2014

इल्म की शम्‍अ जलाओ

    इब्राहीम कुरैशी
इल्म की शम्‍अ जलाओ तो कोई बात बने।
घरों में रौशनी लाओ तो कोई बात बने।।
कल अंजाम जो भी होगा तो देखा जायेगा,
सोच ये अपनी बनाओ तो कोई बात बने।
हमारे आशियानों में अंधेरे काबिज़ है,
बला को मार भगाओ तो कोई बात बने।
कर के साजिश हाए मक्कार बन गए रहबर,
आईना उनको दिखाओ तो कोई बात बने।
अक्सर मिल जाएँगे गिरतों को गिराने वाले,
दौड़कर उनको उठाओ तो कोई बात बने।
ये जुल्म की रात बड़ी लंबी हुई जाती है,
एक सूरज ऊगाओ तो कोई बात बने।
दिलों के बीच ये नफरत की ल$कीरें क्यों है,
आगे बढ़कर इसे मिटाओ तो कोई बात बने।
सोते रहोगे यूँ ही तो न मिलेगी मंजिल,
जागो और सबको जगाओ तो कोई बात बने।
पता 
स्टेशन रोड, महासमुन्द (छ.ग.)- 493445
मोबाईल - 08982733227

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