इस अंक में :

डॉ. रवीन्‍द्र अग्निहोत्री का आलेख '' हिन्‍दी एक उपेक्षित क्षेत्र '' प्रेमचंद का आलेख '' साम्‍प्रदायिकता एवं संस्‍कृति '' भीष्‍म साहनी की कहानी '' झूमर '' सत्‍यनारायण पटेल की कहानी '' पनही '' अर्जुन प्रसाद की कहानी '' तलाक '' जयंत साहू की छत्‍तीसगढ़ी कहानी '' परसार '' गिरीश पंकज का व्‍यंग्‍य '' भ्रष्‍ट्राचार के खिलाफ अपुन '' कुबेर का व्‍यंग्‍य '' नो अपील, नो वकील, घोषणापत्र '' गीत गजल कविता

शनिवार, 30 अगस्त 2014

नवगीत

सलीम खॉ फ़रीद़ 
कब तक जय - जयकार करेगा
अब तो भर हुँकार।
कस कर मुठ्ठी बाँध, गगन से
बरस उठें अंगार।।
तहसीलों में फैल गया है
वंश, हरामी का।
भोले हा$िकम के सर पर,
सेहरा बदनामी का।
बढ़कर गर्दन रेत,
खेत रह जाए खरपतवार।।
अब से सुख की खेती होगी
प्रथा पलटनी है।
दु:ख के माथे पर मिल - जुलकर
शिला पटकनी है।
एक लड़ाई लड़नी तय है,
मौसम से इस बार।।
पता - 
हसामपुर सीकेर
राजस्थान - 332718,
मोबाईल : 9413070032,
09636871101

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