इस अंक में :

इस अंक में पढ़े : ( आलेख )तनवीर का रंग संसार :महावीर अग्रवाल,( आलेख )सुन्दरलाल द्विजराज नाम हवै : प्रो. अश्विनी केशरवानी, ( आलेख )छत्‍तीसगढ़ी हाना – भांजरा : सूक्ष्‍म भेद- संजीव तिवारी,( आलेख )लील न जाए निशाचरी अवसान : डॉ्. दीपक आचार्य,( कहानी )दिल्‍ली में छत्‍तीसगढ़ : कैलाश बनवासी ,( कहानी )खुले पंजोंवाली चील : बलराम अग्रवाल,( कहानी ) खिड़की : चन्‍द्रमोहन प्रधान,( कहानी ) गोरखधंधा :हरीश कुमार अमित,( व्‍यंग्‍य )फलना जगह के डी.एम: कुंदन कुमार ( व्‍यंग्‍य )हर शाख पे उल्लू बैठा है, अन्जामे - गुलिश्ता क्या होगा ?: रवीन्‍द्र प्रभात, (छत्‍तीसगढ़ी कहानी) गुरुददा : ललितदास मानिकपुरी, लघुकथाएं, कविताएं..... ''

शनिवार, 30 अगस्त 2014

नवगीत

सलीम खॉ फ़रीद़ 
कब तक जय - जयकार करेगा
अब तो भर हुँकार।
कस कर मुठ्ठी बाँध, गगन से
बरस उठें अंगार।।
तहसीलों में फैल गया है
वंश, हरामी का।
भोले हा$िकम के सर पर,
सेहरा बदनामी का।
बढ़कर गर्दन रेत,
खेत रह जाए खरपतवार।।
अब से सुख की खेती होगी
प्रथा पलटनी है।
दु:ख के माथे पर मिल - जुलकर
शिला पटकनी है।
एक लड़ाई लड़नी तय है,
मौसम से इस बार।।
पता - 
हसामपुर सीकेर
राजस्थान - 332718,
मोबाईल : 9413070032,
09636871101

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